यह पहला मौका है जब देवता की पदयात्रा शरौंथा से शाही स्नान को हनोल मंदिर पहुंची
- वर्ष 1994 के बाद शाही स्नान को हनोल मंदिर लाए गए देव चिह्न हिमाचली नाटी लोकनृत्य से की देवता की वंदना
उत्तराखंड: 23 April 2026, ब्रहस्पतिवार को (चंदराम राजगुरु, वरिष्ठ पत्रकार) देहरादून / राजधानी स्थित विकासनगर, देहरादून : शिमला जनपद से जुड़े रोहड़ू के शरौंथा गांव में महासू मंदिर का नवनिर्माण कार्य सम्पन्न होने से शाही स्नान को देवता की पदयात्रा हनोल मंदिर पहुंची। तीन दशक बाद देव चिन्हों को लेकर पहुंचे पदयात्रियों ने मंदिर में पूजा दर्शन के बाद हिमाचली नाटी एवं लोकनृत्य से देवता की स्तुति की। श्रद्धालुओं ने देवता का आशीर्वाद लिया।
हिमाचल के रोहड़ू नावर टिकर क्षेत्र के शरौंथा गांव में महासू देवता का प्राचीन मंदिर है। इस गांव में करीब डेढ़ सौ परिवार रहते हैं जो देवता के भक्त हैं। ग्रामीणों ने पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कर नया मंदिर बनाया है। नवनिर्मित मंदिर में देवता के विराजमान होने से पहले 25 से 27 अप्रैल तक विधि विधान से धार्मिक अनुष्ठान एवं प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। 20 अप्रैल को हिमाचल के शरौंथा से पदयात्रियों का जत्था देव चिन्हों को लेकर प्रसिद्ध महासू देवता मंदिर हनोल के लिए चला था, जिसका पहला पड़ाव हाटकोटी व दूसरा त्यूणी देहरादून में रहा।
इस दौरान बुधवार को शाही स्नान के लिए देवता की पदयात्रा तीन दशक बाद ढोल बाजे के साथ हनोल मंदिर पहुंचने पर स्थानीय कारिंदों ने परंपरागत तरीके से स्वागत किया। पदयात्रा में शामिल हिमाचल के श्रद्धालुओं ने देवचिह्नों के साथ महासू मंदिर में पूजा दर्शन के बाद प्रांगण में हिमाचली नाटी व लोकनृत्य के माध्यम से देवता की आराधना की। मंदिर में रात्रि जागरण के बाद गुरुवार सुबह शुभ मुहूर्त पर विधि विधान से देवचिह्नों का शाही स्नान कराया जाएगा।
इसके बाद पदयात्रा वापस मूल स्थान के लिए प्रस्थान करेगी। पदयात्री प्रभुनंद शर्मा, रामरतन चौहान व अनिल चौहान ने बताया वर्ष 1994 के बाद यह पहला मौका है जब देवता की पदयात्रा शरौंथा से शाही स्नान को हनोल मंदिर पहुंची। मंदिर प्रबंधन समिति ने सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे में भोजन की व्यवस्था की। श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन कर देवता से खुशहाली की कामना की। इस मौके पर प्रबंधक नरेन्द्र नौटियाल, सहायक प्रबंधक विक्रम सिंह राजगुरु, अनिल चौहान, जयप्रकाश, कुलदीप चौहान, दलीप पापटा, जय किशन, रोशनलाल, यशनाथ आदि मौजूद रहे।