न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 24 May 2026, रविवार को देहरादून। सूत्रो के हवाले मिली जानकारी में आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय कुछ चर्चित चेहरे लगातार भारत के युवाओं को आंदोलनों, प्रदर्शनों और विवादों की ओर प्रेरित करते दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जो लोग खुद विदेशों में सुरक्षित और सुविधाजनक जीवन जी रहे हैं, क्या उन्हें भारत के युवाओं के भविष्य और करियर की वास्तविक चिंता है?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चर्चा में रहने वाले यूट्यूबर कॉकरोच नंबर 1, ध्रुव राठी Dhruv Rathee जर्मनी में रहते हैं, जबकि सोशल मीडिया कमेंटेटर कॉकरोच नंबर 2, अभिजीत दीपके Abhijit Iyer-Mitra और कॉकरोच नंबर 3. अप्रीत शर्मा ऑस्ट्रेलिया में रहता है। अन्य विदेशी आधारित कंटेंट क्रिएटर्स भी अक्सर भारतीय युवाओं को सरकार विरोधी आंदोलनों, प्रदर्शनों और सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित करते नजर आते हैं।
तीनों कॉकरोच सोचते हैं कि इंडिया के युवाओं को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर आंदोलन, दंगे और प्रदर्शनों में हिस्सा लेना चाहिए, पुलिस केस करने चाहिए और अपना करियर खतरे में डालना चाहिए।
आलोचकों का कहना है कि विदेशों में रह रहे ये सोशल मीडिया चेहरे भारत के युवाओं को पढ़ाई और करियर से भटकाकर आंदोलन और टकराव की राजनीति की ओर धकेलते हैं। उनका मानना है कि युवाओं को अपने भविष्य, शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान देना चाहिए, न कि भावनात्मक या राजनीतिक उकसावे में आकर अपने करियर को जोखिम में डालना चाहिए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी युवा को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे उसका भविष्य, शिक्षा या रोजगार प्रभावित हो। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर बात को आंख बंद कर स्वीकार करने के बजाय तथ्यों की जांच और विवेकपूर्ण निर्णय लेना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ध्रुव राठी जर्मनी से इंडिया को डेमोक्रेसी सिखाता है, अभिजीत दिवेकर अमेरिका से यहां के युवाओं को प्रोटेस्ट करने के लिए इंस्पायर करता है, और अप्रीत शर्मा ऑस्ट्रेलिया में सेफ लाइफ जी रहा है, इंडिया के बच्चों को ‘सड़कों पर उतरने’ की एडवाइस देता है..। .
है ना कमाल की बात?
ये तीनों कॉकरोच विदेश में अपने करियर, सिक्योरिटी, PR और डॉलर-यूरो का पूरा इंतज़ाम करेंगे… और इंडिया में मिडिल क्लास बच्चों से उम्मीद करेंगे कि वे पुलिस के डंडे खाएं, बाल बांधें, और अपना करियर खतरे में डालें?
ये कॉकरोच न तो तुम्हारी बेल के लिए आएंगे, न तुम्हारे मम्मी-पापा को मनाएंगे, और न ही तुम्हारी नौकरी का हर्जाना देंगे। सोशल मीडिया पर रील, ट्वीट और इमोशनल स्पीच देना बहुत आसान है। लेकिन ज़मीन पर इसका नतीजा आम बच्चों को ही भुगतना पड़ता है। दूसरे लोगों के घरों में क्रांति की आग जलाना और दूर से तमाशा देखना नया फैशन बन गया है। सच्ची देशभक्ति का मतलब है देश में रहकर योगदान देना,
सिर्फ विदेश से ज्ञान बांटना नहीं।