उत्तराखंड: 27 JUNE 2026, शनिवार को देहरादून / राजधानी-नई दिल्ली: सूत्रो के मुताबिकपंजाब, उत्तराखंड और मेघालय में समय से पहले हो सकते हैं चुनाव, नवंबर में वोट डाले जाएंगे । वही जिसमें पंजाब की सियासत में इन दिनों एक नई चर्चा ने तूफान ला दिया है। राज्य में विधानसभा चुनाव वैसे तो तय समय के मुताबिक, फरवरी 2027 में होने चाहिए, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज है कि चुनाव अपने समय से करीब 3-4 महीने पहले, यानी नवंबर 2026 में ही कराए जा सकते हैं। हालांकि अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पंजाब, मेघालय और उत्तराखंड में चुनाव समय से पहले कराए जा सकते हैं। इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल भी इससे पहले ऐसा दावा कर चुके हैं।
समय से पहले चुनाव के पीछे क्या हैं कारण: सूत्रों के मुताबिक, चुनावों को पहले खिसकाने के पीछे दो बड़े व्यावहारिक कारण बताए जा रहे हैं. सर्दियों और पहाड़ी इलाकों की मुश्किल पंजाब के साथ-साथ उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों के चुनाव भी आस-पास ही होने होते हैं। क्योंकि जनवरी और फरवरी के महीनों में उत्तराखंड और मणिपुर जैसे पहाड़ी राज्यों में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी होती है, इसलिए वहां चुनाव कराना काफी मुश्किल हो जाता है। ठंड की वजह से लोग वोट डालने भी कम निकलते हैं। इसी वजह से चर्चा है कि इन राज्यों के साथ पंजाब का चुनाव भी नवंबर में ही निपटा लिया जाए।
राष्ट्रीय जनगणना का टकराव: इसके अलावा विपक्षी पार्टियों का ऐसा भी कहना है कि फरवरी 2027 से देश में राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होने वाला है। जब देश की एक बड़ी मशीनरी जनगणना के काम में व्यस्त होगी, तो ऐसे में 5 राज्यों का विधानसभा चुनाव एक साथ संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के एक बयान ने पंजाब का सियासी पारा पूरी तरह गरमा दिया है। बठिंडा में एक रोड शो के दौरान केजरीवाल ने साफ कहा, “मुझे बताया गया है कि चुनाव फरवरी 2027 के बजाय नवंबर 2026 में ही हो सकते हैं। अब हमारे पास सिर्फ कुछ महीने बचे हैं और हमारा एक ही मकसद है- भगवंत सिंह मान को फिर से मुख्यमंत्री बनाना।” हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन सभी दावों और चर्चाओं का पूरी तरह खंडन किया है. बीजेपी का कहना है कि यह सिर्फ कयासबाजी है।
चुनावी मोड’ में आए राजनीतिक दल: किसकी क्या है तैयारी: भले ही तारीखें तय न हों, लेकिन ‘नवंबर 2026’ की इस संभावना ने सभी पार्टियों को अलर्ट कर दिया है। पंजाब में चुनावी सरगर्मियां एकदम तेज हैं।सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) सबसे आगे नजर आ रही है। पार्टी ने बठिंडा से अपने चुनावी अभियान का बिगुल फूंक दिया है। अरविंद केजरीवाल और सीएम भगवंत मान खुद जमीन पर उतर चुके हैं। केजरीवाल लगातार मान सरकार के पिछले चार साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड रख रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि भगवंत मान पर भ्रष्टाचार का एक पैसे का भी आरोप नहीं है।
बीजेपी ने भी पंजाब को लेकर अपनी कमर कस ली है: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पार्टी के बड़े नेताओं ने बैठकें शुरू कर दी हैं और पंजाब के लिए एक मजबूत चुनावी रणनीति को धार दी जा रही है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस अभी इन अचानक तेज हुई गतिविधियों के बीच अपने अंदरूनी समीकरणों को ठीक करने में लगी है। पार्टी फिलहाल अपने संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच तालमेल बिठाने पर फोकस कर रही है।फिलहाल गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। अगर वाकई प्रशासनिक और मौसम संबंधी दिक्कतों को देखते हुए चुनाव नवंबर 2026 में कराने का फैसला लिया जाता है, तो पंजाब के पास अपनी नई सरकार चुनने के लिए बहुत कम वक्त बचा है। यही वजह है कि राज्य का हर छोटा-बड़ा राजनीतिक दल इस वक्त ‘कमर कस कर’ मैदान में उतर चुका है।