मंदिर के पत्थरों में ₹100 में मिल जाता, उसी के लिए ₹500 प्रति स्क्वायर फीट का बिल बनवाया घोटाला?… हे राम!
न्यूज डेस्क / उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड: 11 JULY 2026, शनिवार को देहरादून। उत्तर प्रदेश-अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों और कथित घोटालों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस समय काफी विवाद गरमाया हुआ है। ये राजस्थान के दिलीप सिंह राठौड़ हैं। इनकी पत्थरों की खान है। व्यापारी का दावा: राजस्थान के एक पत्थर खदान मालिक, दिलीप सिंह राठौड़, ने हाल ही में इंटरव्यू देकर आरोप लगाया है कि राम मंदिर के पत्थरों की खरीद में करीब पांच गुना की हेराफेरी हुई है। यूट्यूब चैनल टॉप सीक्रेट को दिए इंटरव्यू में ये कह रहे हैं कि पत्थरों में पांच गुना का घोटाला हुआ। इनकी ट्रस्ट वालों से मेल के जरिये बात हुई थी, इन्होंने मंदिर के लिए पत्थर फ्री देने की पेशकश की थी। लेकिन ये कह रहे हैं कि जो पत्थर हम सौ रुपये में दे देते, लेकिन उन्हीं पत्थरों के लिए 500 रुपये प्रति स्क्वायर फीट का बिल बनवाया गया। राठौड़ के मुताबिक, उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया。राठौड़ का आरोप है कि जो पत्थर उन्हें आसानी से ₹100 में मिल जाता, उसी के लिए ₹500 प्रति स्क्वायर फीट का बिल बनवाया गया।
इनके मुताबिक, जो आज सामने आया है, उसकी शुरुआत तभी हो गई थी जब मंदिर बनाने की तैयारी हो रही थी। इन्होंने कुछ कहने की कोशिश की तो इनको धमकाया भी गया कि ‘हम जो कर रहे हैं करने दो, बीच में मत पड़ो, वरना मार दिए जाओगे, कुछ अता पता नहीं लगेगा।’ राठौड़ साहेब कह रहे हैं कि हम नाम किसी का नहीं लेंगे। जब बड़े बड़े बाहुबली डर रहे हैं तो हमारी क्या औकात है।
अब आप सोचिए, राम मंदिर की जमीन में घोटाला, पत्थर खरीद में घोटाला, निर्माण में घोटाला और 40 प्रतिशत कमीशन का खेल, फिर चंदे में घोटाला, चढ़ावे में घोटाला…. राम मंदिर को संघियों ने अपना निजी एटीएम बना लिया और जमकर लूटा। बिना संगठित लूट के यह सब संभव नहीं है। आजतक कोई इस्तीफा नहीं हुआ, कोई पकड़ा नहीं गया, आठ नौकरों को पकड़कर जनता को झुनझुना थमा रहे हैं क्योंकि बड़े चोर एक दूसरे को बचा रहे हैं।
बता दे कि उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) ने राम मंदिर में दान की गिनती के दौरान शुरुआती तौर पर चोरी के सबूत पाए हैं। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक सदस्य की शिकायत पर 8 कर्मचारियों/सेवादारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये की कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार हुआ है।विपक्षी नेताओं और कुछ सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की प्रत्यक्ष निगरानी में एक उच्चस्तरीय कमेटी से कराई जानी चाहिए।