न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 02 Sep. 2026, देहरादून-धूम्रपान को अक्सर फेफड़ों की बीमारी और कैंसर से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका असर शरीर के कई दूसरे महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है। सिगरेट के धुएं के साथ शरीर में पहुंचने वाले हानिकारक रसायन रक्त प्रवाह के जरिए अलग-अलग अंगों तक पहुंचते हैं। इनमें किडनी भी शामिल है, जो शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक तंबाकू का सेवन शरीर के लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
किडनी लगातार रक्त को फिल्टर करने का काम करती है। इसके साथ ही यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने तथा ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। ऐसे में रक्त प्रवाह से जुड़ी किसी भी समस्या का असर किडनी के कामकाज पर पड़ सकता है।
सिगरेट में मौजूद निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और किडनी तक रक्त पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है। धूम्रपान शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी बढ़ावा दे सकता है, जो लंबे समय में किडनी के ऊतकों और उनकी कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कुछ अध्ययनों में धूम्रपान और क्रॉनिक किडनी डिजीज के बीच संबंध पाया गया है। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या है, उनमें धूम्रपान किडनी से जुड़े जोखिम को और बढ़ा सकता है।
धूम्रपान का प्रभाव केवल किडनी के फिल्टरिंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहता। सिगरेट का धुआं रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ने और रक्त संचार प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
किडनी को अपना काम ठीक से करने के लिए पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। लंबे समय तक रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव किडनी की सामान्य कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
धूम्रपान का असर शरीर के पूरे कार्डियोवस्कुलर सिस्टम पर पड़ सकता है। रक्त वाहिकाओं के प्रभावित होने से हृदय और मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली नसों पर भी असर पड़ सकता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा धूम्रपान शरीर में ट्राइग्लिसराइड और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित कर सकता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है।
सिगरेट को फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन तंबाकू का नुकसान केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है। तंबाकू के धुएं में हजारों रसायन मौजूद होते हैं, जिनमें कई स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माने जाते हैं। लंबे समय तक तंबाकू के संपर्क में रहने से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
धूम्रपान का असर इम्यून सिस्टम, मुंह और मसूड़ों की सेहत, प्रजनन क्षमता और हड्डियों सहित शरीर की कई अन्य प्रणालियों पर भी पड़ सकता है।
धूम्रपान से होने वाले नुकसान को देखते हुए इसे छोड़ना स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या पहले से किडनी संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए तंबाकू से दूरी बनाना बेहद जरूरी है।
नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य संबंधी अध्ययनों में सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या धूम्रपान छोड़ने के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
(साभार)