पष्ठी से पंडालो में विराजेगी महिषासुर: बंगाली लाइब्रेरी में इतिहास रचेगी दुर्गा पूजा, दुल्हन की सजा गया करनपुर क्षेत्र !
देहरादून/उत्तराखण्ड: 19 Oct.–2023: खबर…. राजधानी से बृहस्पतिवार को देहरादून स्थित देशभर में शारदीय नवरात्रि में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारी आज 19 अक्टुबर 2023 रात्री तक पूरी हो गई है। अंतिम रूप दिया जा रहा है। वही देहरादून की बात करे तो शहर में अलग- अलग स्थानों पर एक से बढ़कर एक प्रारूप के पंडाल बनाए गए हैं। जिसमें मुख्य रूप से दुर्गाबाड़ी गढ़ी कैंट, बंगाली लाईब्रेरी करनपुर, ओल्ड डालनवाला करनपुर, लक्ष्मी नारायाण मंदिर करनुपर बाजार, हाथीबड़कता सर्वे स्टेट, ओएलएफ, रायपुर आदि में पष्ठी के दिन दुर्गा पंडालो में मॉ दुर्गा विराजमान होगी।
देहरादून स्थित पंडालो में एलएडी की रंग बिरंगी लाइटिंग की गई। पूरा करनपुर क्षेत्र बंगाली लाईब्ररी करनपुर, पंचायती मंदिर ओल्ड डालनवाला, एवं करनपुर बजार के लक्ष्मी नारायाण मंदिर से सर्वे चौक देहरादून तक दुल्हन की तरह सजाया गया। बता दे की दूर्गा पूजा आयोजको ने पूरे पंडाल को बनाने में लाखो रुपये खर्च किया गए है।
वही, शरद नवरात्रि के षष्ठी/छठे दिन दुर्गा पूजा उत्सव महिषासुर का वध करने वाली मां दुर्गा की भव्य मूर्तियों की पूजा शुरू होता है। इस वर्ष यह शुक्रवार, 20 अक्टूबर, 2023 से मंगलवार, 24 अक्टूबर, 2023 तक मनाया जाएगा। इस साल महानवमी 23 अक्टूबर को है और अगले दिन 24 अक्टूबर 2023 को विजयादशमी का त्योहार है। इन दिनों में जप, तप, हवन व पूजन के बाद मां को विदाई दी जाएगी।
देहरादून स्थित बंगला साहित्य समिति भवन बंगाली लाइब्रेरी करनपुर देहरादून में वर्ष 1922 से आज वर्ष 2023 में 101 वर्ष पूरे होने पर बड़े उत्साह व जोरशोर के साथ दुर्गा महोत्सव मनाया जा रहा है। वही जिसमें बंगाली लाइब्रेरी पूजा समिति के अध्यक्ष आर. एन. मित्र एवं महामंत्री आलोक चक्रवर्ती ने जानकारी दे हुए कहा कि कल यानी 20 अक्टुबर 2023, से शुभ मुर्हत में पूजा प्रारंभ होगी, जिसमें मॉ दुर्गा प्रतिमा एवं श्री गणेश भगवान, श्रीकर्तिक भगवान,मॉ लक्ष्मी व मॉ सरस्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना के साथ पष्ठी प्राण प्रतिष्ठाा अबोधन प्रातः 10.00am बजे से किया जाएगा। वही इस दौरानधार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दिनों में जब देवी दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं तो अलग-अलग वाहन में सवार होकर आती हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि पर माता का आगमन हाथी की सवारी पर होकर आई है।

पूजा समिति बंगाली लाइब्रेरी आलोक चक्रवर्ती ने बताया कि महिषासुर का वध करने वाली मां दुर्गा की भव्य मूर्तियों को रखने के लिए हर साल पंडाल बनाए जाते हैं! इस वर्ष पूजा समिति बंगाली लाईब्ररी करनपुर में आज पूजा के 101 साल पूरे हो गए हैं! अपनी 101वीं वर्षगांठ मानने जा रही है ।आलोक बताते हैं कि माता के श्रृंगार का समान भी कोलकाता से मंगाया गया है। बंगाली लाइब्रेरी पूजा समिति के अध्यक्ष ने बताया कि दुर्गा पूजा समिति द्वारा 101 साल से पूजा आयोजित की जा रही है। यहां दुर्गा पूजा की एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। जहां आपको मां दुर्गा की बेहद ही सुंदर मूर्तियां देखने को मिलतीहै। इन पंडालो में श्रद्धालुगण भारी संख्या में मां दुर्गा के दर्शन के लिए जाते है।
वही इसी के साथ पूजा समिति के पंडित ने बताया कि सबसे पहले ढोल ताशा के साथ भक्त मां नवदुर्गा की प्रतिमा को पंडाल तक लेकर पहुंचेंगे। इसके बाद ब्राह्मणों द्वारा मंत्र उपचार के साथ घट स्थापना और मां नवदुर्गा की प्रतिमा की स्थापना कराई जाएगी। इसके बादन पूजा-पाठ पष्ठी से शुरू विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर आरती करेंगे।
वही इसी के साथ करनपुर क्षेत्र में तीन स्थानो में दुर्गा पूजा आयोजित की जाती हैं जिसमें सबसे पहले सबसे पुरानी इतिहासिक दुर्गा पूजा जिसमें पूजा समिति बंगाली लाईब्ररी करनपुर में 101वीं दुर्गा महोत्सव मनाया जा रहा है। वही दुसरी ओर करनपुर स्थित पंचायती मंदिर ओल्ड डालनवाला में द यंग ब्वायज क्लब द्वारा 50वीं दुर्गा पूजा का आयोजन बड़े धूमधाम के साथ किया जा रहा है। साथ ही करनपुर बजार के लक्ष्मी नारायाण मंदिर में बजरंग सेवा समिति द्वारा आयेजित 33वीं दुर्गा पूजा महोत्सव उत्साह पूर्वक मनाया जा रहा है।
बता दे कि मां दुर्गा की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र 15 अक्टूबर आश्विन शुक्ल प्रतिपदा रविवार को ग्रह.गोचरों के शुभ संयोग में कलश.स्थापना के साथ शुभ मुर्हत में आरंभ की गई। वही दुर्गा पूजा की शुरुआत महालय के दिन से ही हो जाती है, लेकिन पूजा-पाठ पष्ठी से शुरू होता है। देश की प्रमुख नदियों और समुद्र का पानी, प्रमुख स्थानों की मिट्टी लाकर माँ की पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की पूजा शेर पर सवार दस भुजा धारिणी महिषासुर मर्दिनी के रूप में होती है।विधि-विधान से पूजन होता है।