न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 25 JULY 2026-आज देश भर में लाखों युवा पेपर लीक, भर्ती प्रोसेस में देरी, बेरोजगारी और दूसरी कई चिंताओं की वजह से बेचैन है. इस अशांति को सिर्फ कानून-व्यवस्था के मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि समाज के अंदर के दर्द और उम्मीदों की झलक के तौर पर देखना जरूरी है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर अभी स्टूडेंट्स और एक्टिविस्ट्स का प्रोटेस्ट चल रहा है. इसी मुद्दे को लेकर जाने-माने सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है. लेकिन फिर यह मांग हर सरकार और हर पार्टी के लिए समान होनी चाहिए। पेपर लीक पर मंत्री का इस्तीफा माँगना गलत नहीं है। क्योंकि राजनीतिक ईमानदारी का पहला नियम यही है कि जो बात अपने विरोधी के लिए सही लगती है, वही बात अपने पक्ष के लिए भी सही मानी जाए।
जानकारी के मुताबिक एक सूची देखिए।
2006 — AIIMS MBBS पेपर लीक
UPA सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2009 — हरियाणा शिक्षक भर्ती मामला
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2011 — AIEEE पेपर लीक
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2011 — UPPCS मामला
BSP सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2012 — AIIMS MBBS मामला
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2012 — रेलवे ग्रुप D भर्ती मामला
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2012 — TNPSC मामला
AIADMK सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2012 — मुंबई विश्वविद्यालय मामला
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2012 — जम्मू-कश्मीर मेडिकल प्रवेश मामला
नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2012 — अन्ना यूनिवर्सिटी मामला
AIADMK सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2013 — कर्नाटक PUC मामला
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2014 — CBSE 12वीं फिजिक्स पेपर मामला
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2015 — UPPCE मामला
समाजवादी पार्टी सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2021 — REET मामला
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2022 — JSSC CGL मामला
JMM-कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2022 — बिहार भर्ती मामला
महागठबंधन सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2023 — राजस्थान SI भर्ती मामला
कांग्रेस सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2023 — बिहार शिक्षक भर्ती मामला
महागठबंधन सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2024 — झारखंड CGL मामला
JMM सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
2019-22 — महाराष्ट्र TET मामला
महाविकास अघाड़ी सरकार — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं।
अब सवाल यह नहीं है कि पेपर लीक गंभीर अपराध है या नहीं। बिल्कुल है।
लाखों बच्चों का भविष्य प्रभावित होता है।
दोषियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए।
जाँच होनी चाहिए।, जवाबदेही तय होनी चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सिर्फ तब क्यों याद आता है जब सरकार आपकी विरोधी हो?
जब आपकी पार्टी की सरकार में पेपर लीक हो तो मामला “जाँच का विषय” होता है।
और जब दूसरी पार्टी की सरकार में हो तो मंत्री का इस्तीफा “नैतिक जिम्मेदारी” बन जाता है।
यह कैसी राजनीति है? अगर पेपर लीक के हर मामले में शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, तो यह नियम हर सरकार पर लागू होना चाहिए।
और अगर मंत्री का इस्तीफा हर मामले में जरूरी नहीं है, तो फिर इस मांग को राजनीतिक हथियार बनाना भी बंद कीजिए। मेरा मानना है कि जवाबदेही जरूर होनी चाहिए।
लेकिन जवाबदेही का पैमाना पार्टी देखकर नहीं बदलना चाहिए।, वरना यह न्याय की मांग नहीं रह जाती।
यह सिर्फ राजनीतिक सुविधा बन जाती है। और लोकतंत्र में सबसे खतरनाक चीज़ यही है—
जब लोग सिद्धांतों के पक्ष में नहीं, सिर्फ अपनी पार्टी के पक्ष में खड़े होते हैं।#स्रोत: Analyser News द्वारा संकलित डेटा।पेपर लीक पर मंत्री का इस्तीफा माँगना गलत नहीं है।