उत्तराखंड: 06 Nov..2025, ब्रहस्पतिवार को देहरादून / राजधानी स्थित गढ़ बैराट: बावर खत के पुरटाड गांव में शिरगुल महाराज के प्रवास यात्रा पर आने की खुशी में 30 वर्ष बाद परंपरागत बूढ़ी दीवाली मनाने की तैयारी चल रही है। 20 नवंबर को औंसा रात में शिलगांव खत से जुड़े दस गांवों के लोग ढोल बाजे के साथ लोक उत्सव का जश्न मनाने देवता के मंदिर में जमा होंगे। इसके अलावा जौनसार की 29 खतों से जुड़े करीब दो सौ गांवों में बूढ़ी दीवाली के उत्सव की तैयारी चल रही है। स्थानीय लोग परंपरागत नृत्य के साथ दिवाली का जश्न बड़े उत्साह से मनाते हैं। क्षेत्र की नौ खतों से जुड़े सौ गांवों में दीपावली मनाई जा चुकी है।
बावर खत के पुरटाड गांव में प्रसिद्ध महासू देवता मंदिर हनोल के पुजारी रहते हैं। आमतौर से यहां प्रतिवर्ष नई दीवाली मनाई जाती है, लेकिन इस बार शिरगुल महाराज के प्रवास यात्रा पर आने से परंपरागत बूढ़ी दीवाली मनाई जा रही है। मई 2025 में शिरगुल महाराज बरवांश की पूजा अर्चना को शिलगांव खत के छजाड गांव से प्रवास यात्रा पर पुरटाड मंदिर में विराजमान हुए थे। वर्ष 1995 के बाद देवता के प्रवास यात्रा पर आने की खुशी में स्थानीय लोग परंपरा के अनुसार बूढ़ी दीवाली मना रहे हैं।
लोक मान्यता के अनुसार जहां शिरगुल महाराज प्रवास पर रहते हैं वहां बूढ़ी दीवाली मनाने की परंपरा है। देवता के आगमन की खुशी में तीन दशक बाद पुरटाड में बूढ़ी दीवाली के जश्न की तैयारी चल रही है। तीन दिवसीय लोक उत्सव में 20 नवंबर को औंसा रात में शिलगांव खत से जुड़े छजाड, हरटाड, भूनाड, ऐठान, भटाड, डांगूठा, पटियूड, कथियान समेत दस गांवों के लोग ढोल बाजे के साथ होलियाच लेकर पुरटाड में जमा होंगे। यहां औंसा रात को लोक नृत्य के साथ बूढ़ी दीवाली का परंपरागत जश्न मनाया जाएगा। इसके बाद 21 व 22 नवंबर को बिरुडी एवं जंदोई मनाई जाएगी।
अरसे बाद बूढ़ी दीवाली के आयोजन से ग्रामीणों में उत्साह है। शिलगांव खत के स्याणा महेंद्र सिंह चौहान, स्याणा जयंन्द्र सिंह चौहान, पुरटाड के स्याणा मदनचंद डोभाल, प्रधान स्वाति देवी, पूर्व प्रधान मुन्नाराम, शांतिराम डोभाल, जयलाल डोभाल, भागीराम डोभाल, इंदराम डोभाल व जोतराम डोभाल ने कहा देवता की प्रवास यात्रा से बूढ़ी दीवाली के जश्न की तैयारी चल रही है। क्षेत्र के अन्य इलाकों से लोग बड़ी संख्या में देवता के दर्शन को बूढ़ी दीवाली मनाने पुरटाड पहुंचेगें। स्थानीय लोग घरों की साफ सफाई एवं साज सजावट के साथ मेहमानों की खातिरदारी की तैयारी में जुटे हैं।
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इन गांवों में करते हैं देवता प्रवास: देव परंपरा के अनुसार शिरगुल महाराज निर्धारित प्रक्रिया के तहत बरवांश की पूजा अर्चना को जौनसार बावर व रवांई घाटी से जुड़े ग्राम छजाड, भूठ, ऐठान, भटाड, पुरटाड, बाणाधार, पुनाह पोखरी, पुरोला, ढकाड़ा, खलाडी समेत अन्य गांवों में प्रवास यात्रा पर रहते हैं। पुरटाड में देवता एक साल तक प्रवास पर रहेंगे। इसके उपरांत देवता की अगली प्रवास यात्रा का कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
(वरिष्ठ पत्रकार चंदराम राजगुरु)