कभी सोचा है कि आज पूरे देश की नजर बंगाल चुनाव पर क्यों टिकी हुई है?

इसीलिए बंगाल का चुनाव पूरे देश के लिए इतना महत्वपूर्ण है

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 30 April 2026, गुरुवार को देहरादून। सूत्रो के मुताबिक क्या आपने कभी सोचा है कि आज पूरे देश की नजर बंगाल चुनाव पर क्यों टिकी हुई है?
और बंगाल चुनाव पर जिस तरह आज पूरे देश का ध्यान है उतना ध्यान अन्य राज्यों के चुनाव पर क्यों नहीं है ?असल में ये कोई चुनाव नहीं है बल्कि हिंदुत्व का अश्वमेध यज्ञ है।जहां भाजपा हिंदुत्व का झंडा लेकर इस अश्वमेध यज्ञ को पूरा कर वामपंथ के गढ़ में हिंदुत्व का परचम लहराना चाहती है। तो दूसरी तरफ सारे वामपंथी और देशविरोधी तत्व हर हाल में अपना ये किला बचाना चाहती है।इसीलिए बंगाल चुनाव भाजपा समेत पूरे देश के लिए इतना महत्वपूर्ण हो जाता है।क्योंकि बंगाल सिर्फ एक राज्य नहीं है बल्कि वो वामपंथ की जननी है।वामपंथ इसी बंगाल की धरती से निकल कर पूरे देश में फैलता है।

इसीलिए बंगाल पर फतह के बिना भाजपा की हर विजय नीरस है, क्योंकि चाहे भाजपा पूरा हिंदुस्तान ही क्यों न जीत ले लेकिन जबतक वो बंगाल नहीं जीतती है तबतक वामपंथ पर लगाम बेहद मुश्किल है और उस समय तक “सरकार तुम्हारी लेकिन सिस्टम हमारी” वाला खेल चलता रहेगा।इसके अलावा बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या का गेटवे यही बंगाल और असम है जिसमें से असम पर कब्जा हो चुका है और बंगाल बचा है।
साथ ही साथ रणनीतिक दृष्टि से भी बंगाल एक महत्वपूर्ण राज्य है

क्योंकि भारत को सेवन सिस्टर्स को जोड़़ने वाला सिल्लीगुड़ी कॉरिडोर भी इसी राज्य में है जहां का जनसांख्यकीय अनुपात में परिवर्तन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। इसीलिए बंगाल चुनाव कोई ईगो या नाक की लड़ाई नहीं है बल्कि ये रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठिए से लेकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा से जुड़ी एवं हिंदुत्व/ वामपंथ लड़ाई है जिसे भाजपा को जीतना ही चाहिए।

और यदि किसी कारण से भाजपा ये लड़ाई नहीं जीत पाती है तो ये सिर्फ भाजपा की नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील हर राष्ट्रभक्त,हिंदुओं के लिए चिंतित हर धर्मभक्त एवं बांग्लादेशी रोहिंग्या की समस्या से दुखी हर देशभक्त की हार होगी।
इसीलिए बंगाल का चुनाव पूरे देश के लिए इतना महत्वपूर्ण है और सभी संवेदनशील लोगों का यही मानना रहता है कि चुनाव परिणाम चाहे जो भी आए लेकिन बंगाल में भगवा ध्वज लहराना ही चाहिए क्योंकि इसके सिवा कोई दूसरा रास्ता है ही नहीं।
93%+ मतदान?भाई भाई वाह!

दूसरे चरण के मतदान से पहले हम यह तो नहीं कहेंगे कि बंगाल में इस बार रोटी पलट गई।लेकिन यह जरूर कहेंगे कि 2011 में जब 84% वोट लेकर ममता ने दशकों से जमे वामपंथियों की रोटी ही नहीं पलटी,पूरा तवा कड़ाही ही उलट दिया था। तब क्या कारण है कि बंगाल में 93 – 94% वोट पड़ने पर भी बीजेपी इस बार टीएमसी के घोर गुंडों के दम पर चल रहे साम्राज्य को नहीं उखाड़ फेंकेगी?बुजुर्ग कहते थे कि कड़ाहे में जब खांड से भूरा कूटा जाता है तब लकड़ी का मूसल कभी इधर से उधर और उधर से इधर चलता है तो मीठा मीठा भूरा बन ही जाता है।4 मई को भूरे से बनाई मिठाई तृणमूल खाती है या बीजेपी,अभी प्रतीक्षा करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में यदि मतदान का आंकड़ा 90 प्रतिशत के ऊपर पहुंचा है तो यह केवल एक संख्या नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा सकता है।आम तौर पर इतना अधिक मतदान मतदाताओं की असाधारण सक्रियता और चुनाव के प्रति गंभीरता को दर्शाती है।सुरक्षा बलों के दम पर मतदाता सड़कों पर उमड़ पड़े।

ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या यह सत्ता परिवर्तन की आहट है?ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने लंबे समय से बंगाल की राजनीति पर पकड़ बनाए रखी है।वहीं भारतीय जनता पार्टी लगातार अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी है।ऐसे में बढ़ा हुआ मतदान दोनों पक्षों के लिए उम्मीद और आशंका दोनों लेकर आता है।लेकिन कुलक्षणी राजनीति की जन्मदात्री ममता बनर्जी जिस तरह लोकतंत्र और संविधान की शत्रु बन गई हैं,उनके जाने में ही बंगाल की भलाई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजनैतिक विश्लेषण के अनुसार ज्यादा मतदान कई बार बदलाव की इच्छा का संकेत होता है।लेकिन बंगाल जैसे कैडर-आधारित राज्य में यह सत्ता पक्ष के मजबूत संगठन का परिणाम भी हो सकता है।खास कर महिलाओं और ग्रामीण मतदाताओं की बड़ी भागीदारी सत्ताधारी दल के पक्ष में भी जा सकती है।पर अनेक विश्लेषक इसे नहीं मानते।फिर भी “रोटी पलट गई” कहना तो फिलहाल जल्दबाजी होगी।लेकिन मतदान प्रतिशत संकेत देता है कि ममता को अब अपनी गुंडागर्दी से बाज न आना काफी भारी पड़ सकता है।

एक जमाना था जब देश की सबसे बड़ी गुंडा पार्टी शिवसेना थी।शिवसेना में जब राज ठाकरे जैसे मवाली का प्रवेश हुआ तब शिवसेना के गुंडाराज ने सारी सीमाएं पार कर दी।लेकिन ममता की हिंसक तोलाबाजी ने तो आधे बंगाल को नर्क ही बना डाला है।बंगाल को घुसपैठियों की जन्नत बना देने वाली ममता की विदाई बीजेपी,कांग्रेस,वामपंथ तीनों पार्टियों के लिए भी शुभ होगी खास कर बंगाल की जनता के लिए ।

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