क्या? राखी का रिश्ता पैसों और लेन-देन का विषय और मजाक बनकर रह गया।

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 28 AUG. 2026, देहरादून ।देश भर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है.इस अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। वहीं, भाइयों ने अपनी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का यह त्योहार घरों से लेकर सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों तक उत्साह के साथ देखा गया।

वही  जानकारो की माने तो  *क्या?  रक्षाबंधन एक त्योहार नहीं… अब लोगों के लिए सिर्फ एक मजाक बनकर रह गया है?* कल रात बच्चे Instagram Reels देख रहे थे। अचानक एक Reel की आवाज कानों में पड़ी—

*क्या बुआ, राखी पर हमारे पापा को लूटने आई हो?* दूसरी Reel में भी कहां गया कि *क्या बुआ राखी पर हमे केवल ₹10 ही दोगी?* राखी का रिश्ता पैसों और लेन-देन का विषय और मजाक बनकर रह गया।
कुछ सेकंड के उस मनोरंजन ने मेरे मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—क्या हमने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को भी सिर्फ ‘Content’ और ‘Views’ का विषय बना दिया है? रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने और पैसे लेने का त्योहार नहीं है। इसमें बचपन की लड़ाइयाँ हैं, रूठना-मनाना है, बहन का स्नेह है, भाई की चिंता है और वह विश्वास है कि मुश्किल वक्त में एक अपना हमेशा साथ खड़ा रहेगा। लेकिन आज सोशल मीडिया पर रिश्तों को भी मजाक के छोटे-छोटे वीडियो में समेट दिया गया है।
कहीं बहन को “ भाई को लूटने आने वाली” बताया जाता है, तो कहीं बुआ को सिर्फ पैसे देने वाला पात्र बना दिया जाता है।
और कुछ समय पहले एक Reel में बहन भाई के कमरे में AC चलाकर सोती है और भाई मजाक में ऐसा गीत चला देता है जिसका भाव होता है— “बाबुल का यह घर बहना, कुछ दिन का ठिकाना है…”
इसे देखकर एक और सवाल मन में आया—क्या शादी के बाद बेटी का मायका सचमुच उसका अपना नहीं रहता? जिस घर में उसने बचपन बिताया, जहाँ वह बिना झिझक अपने भाई से लड़ती थी, माँ के हाथ का खाना खाती थी और पिता से अपनी हर बात कहती थी… वह घर शादी के बाद उसके लिए पराया कैसे हो सकता है?
बेटी मायके से दूर जाती है, मायका उससे दूर नहीं होता। इसी बीच रक्षाबंधन से जुड़े GIVA के एक विज्ञापन को लेकर भी बहस और विवाद सामने आया, जिसमें अभिनेत्री कृति सेनन एक कुत्ते को राखी बांधती दिखाई देती हैं।
यहाँ किसी ब्रांड, अभिनेत्री या विज्ञापन पर फैसला सुनाना मेरा उद्देश्य नहीं है।
सवाल इससे बड़ा है—क्या हर पवित्र भावना को सिर्फ विज्ञापन, मनोरंजन और वायरल कंटेंट में बदल देना जरूरी है? आज हमारे बच्चे सिर्फ Reels नहीं देख रहे। वे उनसे भाषा सीख रहे हैं, व्यवहार सीख रहे हैं और रिश्तों को देखने का नजरिया भी सीख रहे हैं।
इसलिए जिम्मेदारी सिर्फ Content Creator की नहीं, हमारी भी है।  हर Reel पर हंसना, हर वीडियो शेयर करना और हर विवादित कंटेंट को वायरल कर देना भी उस सोच को बढ़ावा देता है। वायरल होना गलत नहीं है।मनोरंजन करना भी गलत नहीं है। लेकिन रिश्तों की कीमत पर मनोरंजन क्यों?

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