पीएम मोदी की अपील के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 13 May 2026, बुधवार को मीडिया रिपोर्ट के अनुसार  देश में बढ़ती महंगाई, वैश्विक संकट और ईंधन आयात पर बढ़ती निर्भरता के बीच प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी  द्वारा डीजल-पेट्रोल की बचत, खाद्य तेल का सीमित उपयोग और एक वर्ष तक सोना कम खरीदने की अपील किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्षी दलों और उनके समर्थकों ने इस बयान की आलोचना शुरू कर दी, जबकि समर्थकों का कहना है कि यह अपील देशहित में की गई है।

 बता दे कि मई 2026 में, पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए 7 प्रमुख अपीलें की हैं। इस अपील का उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों के दौरान देश को आत्मनिर्भर बनाना है:

Deccan Herald +1
  • ईंधन की बचत: पेट्रोल-डीजल और गैस का कम उपयोग करें।
  • सोना न खरीदें: एक साल तक अनावश्यक सोना खरीदने से बचें।
  • विदेशी यात्रा टालें: एक वर्ष तक गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें।
  • वर्क फ्रॉम होम: ईंधन खपत कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम को अपनाएं।
  • सार्वजनिक परिवहन: निजी वाहनों की जगह मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें।
  • खाद्य तेल में कमी: कुकिंग ऑयल (खाद्य तेल) का उपयोग समझदारी से करें।
  • स्वदेशी उत्पाद: स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों का उपयोग बढ़ाएं।
अपील का असर: समर्थकों का तर्क है कि पूर्व प्रधानमंत्री Lal Bahadur Shastri के समय भी देशहित में की गई अपीलों का राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था। उस दौर में खाद्यान्न संकट के समय लोगों से उपवास रखने की अपील की गई थी और अधिकांश राजनीतिक दलों ने इसे राष्ट्रीय हित मानकर सहयोग दिया था।

वर्तमान बहस में यह भी कहा जा रहा है कि यदि हर व्यक्ति महीने में थोड़ा कम तेल उपयोग करे और 2 से 3 लीटर डीजल-पेट्रोल की बचत करे, तो इससे न केवल व्यक्तिगत खर्च कम होगा बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से अधिक तेल के सेवन से बचने की सलाह देते रहे हैं।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती ईंधन खपत को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। कई जगहों पर लोग छोटी दूरी तय करने के लिए भी बाइक या अन्य वाहनों का उपयोग करते हैं, जबकि वह दूरी पैदल आसानी से तय की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी-छोटी बचतें मिलकर बड़े स्तर पर राष्ट्रीय संसाधनों की बचत कर सकती हैं।

हालांकि विपक्ष का कहना है कि महंगाई और ईंधन की कीमतों के लिए सरकार जिम्मेदार है और आम जनता पर बोझ डालना उचित नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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