जिला अस्पताल की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है, मरीजो की तीन हाईटेक सुविधाएं कागजों तक सीमित

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उत्तराखंड: 03 AUG. 2026, सोमवार को देहरादून । / राजधानी स्थित सूत्रो के मुताबिक प्रतिष्ठित पंडित दीनदयाल उपाध्याय (कोरोनेशन ) जिला अस्पताल देहरादून में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के तमाम दावे सिर्फ कागजी साबित हो रहे हैं। इस  जिला अस्पताल की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है, जहां मरीजों के लिए प्रस्तावित तीन बड़ी हाईटेक सुविधाएं लंबे समय से अधर में लटकी हुई हैं। प्रशासनिक सुस्ती, विभागों के बीच तालमेल की कमी और सुस्त कार्यशैली के चलते आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरन मरीजों को महंगे निजी सेंटरों के चक्कर काटकर अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
​ वही जिसमें  हमारे वरिष्ठ संवाददाता द्वारा कोरोनेशन अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (PMS) डॉ. यातेंद्र सिंह से की गई विशेष बातचीत में इन प्रमुख सुविधाओं के अटकने के असली कारणों का खुलासा हुआ है: प्राप्त जानकारी के मुताबिक….
​1. MRI विभाग: दो साल से तैयार, पर मशीन का अता-पता नहीं
​जमीनी हकीकत: अस्पताल का MRI कक्ष पिछले दो सालों से पूरी तरह बनकर तैयार है, लेकिन इसे इंस्टॉल करने वाली प्राइवेट कंपनी की सुस्त कार्यशैली के कारण मशीन अब तक स्थापित नहीं हो पाई है।
​लापरवाही: इस गंभीर देरी को लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक को कई बार अवगत कराया जा चुका है, बावजूद इसके व्यवस्था कुंभकर्णी नींद में सोई हुई है।
​2. ब्लड बैंक यूनिट: बजट, सीलन और मैनपावर के चक्रव्यूह में फंसी
 वही जिसमें  ​जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल के प्रयासों से शुरू की गई इस महत्वपूर्ण ब्लड बैंक यूनिट की राह में कई बड़ी और चौंकाने वाली अड़चनें खड़ी हैं:  ​ढांचागत कमियां: ब्लड बैंक की दीवारों में सीलन आ चुकी है और एक बड़ी कांच की दीवार टूटी हुई है, जिसकी मरम्मत अभी बाकी है।
 साथ ही ​बजट का संकट: जरूरी चिकित्सा उपकरणों की परचेसिंग के लिए बजट का भारी अभाव बना हुआ है। साथ ही ​मैनपावर का अकाल: सबसे बड़ी बाधा कर्मचारियों की भारी कमी है, जिसे दूर करने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय, उत्तराखंड से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
​उम्मीद की किरण: हालांकि,(कोरोनेशन ) जिला अस्पताल देहरादून  पीएमएस डॉ. यातेंद्र सिंह ने उम्मीद जताई है कि यदि अगले दो महीनों में बजट और उपकरणों की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो कार्यरत संस्था जल्द ही इसे हैंडओवर कर देगी।
​3. डेंटल यूनिट: कछुआ गति से चलता निर्माण, जनता की जेब पर भारी:
 सुस्त रफ्तार: साथ ही  गांधी शताब्दी नेत्र अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन डेंटल यूनिट का काम वर्तमान में बेहद सुस्त (कछुआ) गति से चल रहा है।  ​निगरानी और स्थिति: इस प्रोजेक्ट पर विशेष निगरानी के लिए डॉ. दिनेश चौहान को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है जो इस पर फोकस बनाए हुए हैं, लेकिन धरातल पर यह प्रोजेक्ट अभी अधर में लटका नजर आ रहा है, जिससे मरीजों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
निष्कर्ष: सरकार और स्वास्थ्य विभाग भले ही सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देने के लाख दावे करे, लेकिन प्रशासनिक और लचर व्यवस्था के कारण जनता पिस रही है। यदि MRI, ब्लड बैंक और डेंटल यूनिट जैसी ये तीनों अहम सुविधाएं जल्द शुरू नहीं होती हैं, तो राजधानी के मरीजों का यह दर्द और गहराता जाएगा।

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