करोड़ों की सुरक्षा, फिर भी सवालों के घेरे में चढ़ावा व्यवस्था—जांच में नए खुलासे
न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 01 JULY 2026, बुधवार को देहरादून। उत्तर प्रदेश स्थित आयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकारण मामले में प्राप्त जानकारी के मुताबिक चंपत राय.बंसल की अपनी अलग दुनिया थी। जैसे कोई राजा टाइप जैसी,अपनी सेना जिसे निजी सेक्यूरिटी गार्ड्स कहते हैं!1 करोड़ रुपया महीना और सालाना 12 करोड़ निजी सेक्यूरिटी गार्ड्स को दिए जा रहे थे वो भी नंबर एक से और अकाउंट से।घोटाले का दायरा: शुरुआती अनुमानों के अनुसार, दान-पात्र और गिनती कक्ष से लगभग ₹7.75 करोड़ की हेराफेरी का दावा किया गया है।
ये सेक्युरिटी गार्ड्स लूट के मॉल के रूट पर तैनात रहते थे।ये चढ़ावा चोरी का मामला आपको जितना सरल लगता है वो बेहद पेचीदा और साजिशों से भरा हुआ है। बहुत ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल गैंग की तरह इसे ऑपरेट किया जा रहा था।
जानकारी के मुताबिक श्री राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा अब और बड़ा होता दिख रहा है।सूत्रों के मुताबिक मंदिर परिसर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। उनकी ड्यूटी, रोस्टर, CCTV फुटेज, एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
साथ ही एसआईटी (SIT) जांच: पुलिस विशेष जांच दल (SIT) द्वारा मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पुलिस द्वारा पूछताछ की जा चुकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद मंदिर परिसर में इतनी बड़ी संख्या में निजी गार्ड क्यों लगाए गए थे?
सूत्रों का दावा है कि जिस निजी सुरक्षा कंपनी को यह जिम्मेदारी दी गई थी,वह RSS से जुड़े बिहार के एक पदाधिकारी से संबंधित बताई जाती है, जो पूर्व सांसद भी रह चुके हैं। इसी कंपनी पर ट्रस्ट हर महीने करीब 1 करोड़ रुपये खर्च करता था। यानी सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये निजी सुरक्षा पर खर्च हो रहे थे।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि चढ़ावे के आवागमन के दौरान नियमों का पालन हुआ या कुछ लोगों को बिना जांच के आने-जाने की छूट दी गई। सवाल यह भी है कि अगर दान-पात्र, गिनती कक्ष और चढ़ावा रूट पर निजी सुरक्षा तैनात थी,तो चोरी और गड़बड़ी कैसे होती रही?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में हर दिन नया खुलासा हो रहा है, और जांच अब छोटे कर्मचारियों से आगे बढ़कर पूरे सुरक्षा और प्रबंधन सिस्टम की तरफ जाती दिख रही है।
अब जांच सिर्फ गिनती कक्ष तक सीमित नहीं है।बैंक नियमों के उल्लंघन,ट्रस्ट की निगरानी,निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका और करोड़ों के सुरक्षा खर्च तक सवालों के घेरे में हैं।