विधानसभा सत्र के पहले दिन सड़क पर उतरा विपक्ष, पुलिस ने किया बल प्रयोग

भराड़ीसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के दो दिवसीय सत्र के पहले दिन भराड़ीसैंण में राजनीतिक माहौल गरमा गया। प्रदेश कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर तीखी झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया और पानी की बौछारें छोड़ीं। वहीं, बैरिकेडिंग के दौरान एक उक्रांद कार्यकर्ता के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर सामने आई है।
कांग्रेस ने प्रदेश में भ्रष्टाचार, बदहाल सड़कों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं, महिला अपराध, पलायन और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। पार्टी कार्यकर्ताओं ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय, चंदा चोरी, वोट चोरी और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक जैसे मामलों को भी प्रमुखता से उठाया।
दिवालीखाल में पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प
विधानसभा सत्र के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए भराड़ीसैंण विधानसभा भवन से करीब 30 किलोमीटर पहले विभिन्न स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी। इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर तक पहुंचने से रोकना था। हालांकि, पुलिस की रोक के बावजूद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता दिवालीखाल पहुंच गए, जहां उनकी पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक हुई।
प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य करण माहरा, प्रदेश सहप्रभारी मनोज यादव, बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला, मुकेश नेगी और हरिकृष्ण भट्ट समेत कई नेता शामिल हुए। इस दौरान पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
विधानसभा परिसर के बाहर विधायकों ने दिखाई तख्तियां
कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा भवन के बाहर हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विधायकों ने प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार, जनसमस्याओं और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी की। वहीं, विधानसभा के भीतर भी विपक्षी विधायकों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया।
कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रही है।
गणेश गोदियाल बोले- जनता के सवालों का जवाब दे सरकार
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में उत्तराखंड की जनता अनेक बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। सड़कों की बदहाली, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं, महिला सुरक्षा और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता की आवाज बनकर इन मुद्दों को विधानसभा के भीतर और बाहर लगातार उठाती रहेगी। सरकार को जनता से किए गए वादों, प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों, सामाजिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
गोदियाल ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और राज्य आंदोलन के सपनों का प्रतीक है। ऐसे में विधानसभा सत्र के दौरान जनता की वास्तविक समस्याओं पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस युवाओं, महिलाओं, किसानों, कर्मचारियों और आम नागरिकों से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाती रहेगी। साथ ही अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय सहित प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर जवाबदेही की मांग जारी रखेगी।
उक्रांद कार्यकर्ताओं ने भी तोड़ी बैरिकेडिंग
दूसरी ओर, उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने भी विधानसभा भवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया। युवा उक्रांद नेता आशीष नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया और पानी की बौछारें छोड़ीं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
बताया जा रहा है कि उक्रांद कार्यकर्ताओं ने पुलिस को छकाते हुए दोपहर करीब तीन बजे तक विधानसभा परिसर के आसपास पहुंचने का प्रयास जारी रखा। बैरिकेडिंग में फंसने से एक कार्यकर्ता के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर है।
विधानसभा सत्र के पहले दिन हुए इन प्रदर्शनों के चलते भराड़ीसैंण और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। विपक्ष ने जहां जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा, वहीं पुलिस प्रशासन प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर तक पहुंचने से रोकने में जुटा रहा।