संपादकीय: किसी भी राज्य सरकार में सांसद से ज्यादा विधायक पावरफुल होता है! 

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 24 JUNE 2026, संपादकीय….. जानकारी के मुताबिक किसी भी राज्य सरकार में सांसद से ज्यादा विधायक पावरफुल होता है!  देखिए, भाजपा संगठन की प्रयोगशाला मध्यप्रदेश है स्पष्ट है वहां का प्रशासन पूरी भांति संगठन के अनुरूप है… अपितु प्रशासन पर संगठन की पूरी पकड़ है और सरकार पर भाजपा की पूरी पकड़ है और संघ की सरकार और प्रशासन दोनों पर पकड़ है। वहां पुराने कार्यकर्ता बड़े रोब से जनता का काम करवाते हैं सरकारी कार्यालयों में… भाजपा कार्यकर्ता छोड़ो बल्कि संघ के स्वयंसेवकों का बहुत रुतबा है सरकारी दफ्तरों में।हम गुजरात पर चर्चा नहीं करेंगे उसे एक साइड रखते हैं… पर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में ऐसा क्या अंतर है?

उत्तरप्रदेश में उलट है… यहां संगठन ही सरकार को सत्ता में लाया और बाद में सरकार द्वारा संगठन को ही सत्ता से बेदखल कर दिया गया… सोचो सरकार लाने वाले ही सरकार से बेदखल कर दिए गए हों तो कितनी दयनीय हालत है वहां भाजपा की। यूपी में संघ को तो 2018 से ही सत्ता से बेदखल कर दिया था सरकार ने,, बाद में भाजपा को बेदखल कर दिया गया।

किसी भी राज्य सरकार में सांसद से ज्यादा विधायक पावरफुल होता है क्योंकि उसका राज्य सरकार में सीधा हस्तक्षेप होता है… पर यूपी में विधायक की एक दारोगा ही नही सुनता तो सांसद की क्या औकात होगी? इसके उलट मध्यप्रदेश जहां कार्यकर्ता ही पावरफुल है, वहां विधायक और सांसद कितने ताकतवर होते होंगे? मध्यप्रदेश के मतदाता को पता था किसी सांसद प्रत्याशी को जिताने के क्या मायने हैं।

किसी भी राज्य में जब सरकार आती है सत्तारूढ दल का प्रयास रहता है प्रशासन में अपने विश्वसनीय लोग फिट करना और सरकारी अमले में अपनी एक लॉबी स्थापित करना… ताकि वह प्रशासनिक लॉबी सत्ताधारी पार्टी के मतदाताओं का काम कर सके। परंतु यूपी में दूसरे कार्यकाल आने के बावजूद अभी तक प्रशासन में भाजपाई लॉबी या विश्वसनीय लॉबी नही है कोई। प्रशासन में आज भी विपक्ष के करीबी अधिकारी काबिज हैं सरकार वही चला रहे हैं… वह विपक्ष के करीबी अधिकारी भाजपाइयों और हिंदूवादियों की सुनवाई तक नही करता… राष्ट्रवादियों को इतनी नफरत से देखता हैं यूपी के कर्मचारी। इसके उलट प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी सपाई के काम आज भी कर रहे हैं।

यह विपक्ष के करीबी कर्मचारी खुलकर रिश्वत भ्रष्टाचार कर रहे हैं… जब अपनी सरकार में संगठन के लोगों को सारे काम पैसों से ही करवाने पड़ते हैं तो ऐसे में भाजपा का ठप्पा लगवाकर वह क्यों बैर मोल ले? वहीं मध्यप्रदेश में यदि किसी कार्यकर्ता पर भाजपा का ठप्पा लगा हुआ है तो यह ठप्पा उसे क्षेत्र में विशेष होने की अनुभूति करवाता है।

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