उत्तराखंड: 03 May 2026, रविवार को देहरादून/राजधानी का सबसे बड़ा राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल एक बार फिर अपनी चिकित्सा सेवाओं के लिए नहीं, बल्कि अपने स्टाफ की बदतमीजी और गुंडागर्दी के लिए सुर्खियों में है। शनिवार रात अस्पताल की इमरजेंसी ओटी (OT) परिसर में जो हुआ, उसने अस्पताल प्रशासन के सुरक्षा दावों की पोल खोल कर रख दी है।
शराब के नशे में चूर गार्ड, तीमारदारों पर ‘वार’
ताजा मामला शनिवार रात करीब 9:30 बजे का है। जानकारी के अनुसार, कुछ पत्रकार अपने एक घायल मित्र का उपचार कराने इमरजेंसी पहुंचे थे। उपचार कराकर लौटते समय पार्किंग को लेकर वहां तैनात उपनल के गार्डों ने बिना किसी उकसावे के पत्रकारों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। हद तो तब हो गई जब गार्डों ने पत्रकारों के कॉलर पकड़ लिए और हाथापाई पर उतारू हो गए। बीच-बचाव करने आए वरिष्ठ पत्रकारों के साथ भी इन सुरक्षाकर्मियों ने अभद्रता की।
अस्पताल प्रशासन मौन या मिलीभगत?
मरीजों का आरोप है कि यहां तैनात गार्ड अक्सर रात के समय शराब के नशे में धुत रहते हैं और छोटी-छोटी बातों पर मरीजों और उनके परिजनों से मारपीट करते हैं। विडंबना देखिए कि अस्पताल प्रशासन इन घटनाओं पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय अपने स्टाफ के कारनामों पर पर्दा डालने में माहिर हो गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि दून अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा के नाम पर ‘बदमाश’ पाल रखे हैं, जिन्हें कानून या अधिकारियों का कोई खौफ नहीं है। वही इस मौके पर तैनात दून अस्पताल के पीआरओ विपिन राणा कमर पर हाथ रख सारा तमाशा देख रहा था। इस कर्मी जरा भी जहमत नही उठाई की मामले में बीच बचाव करें। विडियो में देख सकते हो इस कमी को। जबकि इसकी डियूटी अस्पताल में व्यवस्थ बना रखना होती है।
वीडियो फुटेज में कैद हुई बदतमीजी, आर-पार की लड़ाई
घटना का वीडियो फुटेज भी सामने आया है, जिसमें गार्ड स्पष्ट रूप से गाली-गलौज और धक्का-मुक्की करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो साक्ष्य के तौर पर डिप्टी एमएस को भी भेज दिया गया है।
पत्रकार संगठनों ने खोला मोर्चा–इस घटना से पत्रकारों में भारी रोष है। पत्रकारों का कहना है कि: इस मामले में दून अस्पताल की प्राचार्य से पत्रकार मिलकर वार्ता करेंगे अगर इस पर गार्ड के ऊपर कारवाई नहीं हुई और ऐसे गुंडे बदमाश गार्ड्स पाल रखे हैं इन पर कार्रवाई ठोस नहीं हुई तो पत्रकार संगठन स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करेगा।
उत्तराखण्ड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री तक पहुँचेगी गूँज: यदि दोषी गार्डों को तत्काल नहीं हटाया गया और प्रशासन का रवैया ढुलमुल रहा, तो पत्रकार संगठन सीधे स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर अस्पताल की इस अराजकता की शिकायत करेंगे।
बड़ा सवाल: क्या स्वास्थ्य सेवाओं के इस केंद्र में अब मरीज सुरक्षित हैं? क्या दून अस्पताल का प्रशासन इन ‘वर्दीधारी गुंडों’ पर नकेल कसेगा या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करेगा?