धर्मेंद्र गए तो प्रहलाद आये,व्यक्ति बदल जाए मगर उद्देश्य नहीं बदलना चाहिए।

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 27 JULY 2026,   EDOTORIAL…गौरतलब है कि जुलाई 2026 में छात्र विरोध प्रदर्शनों और पेपर लीक के मुद्दों के बीच  जानकारी के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का नया प्रभार सौंपा गया है। इसी राजनीतिक बदलाव को धर्मेंद्र गए तो प्रहलाद आए के रूप में व्यक्त किया जा रहा है। दिल्ली पर पांडवो ने भी शासन किया है,तोमरो ने भी, चौहानों ने भी और आख़िरकार मराठाओ ने भी।प्रजा के तौर पर राजवंश या राजा से हमें फर्क तो पड़ता है मगर शासन एक हिन्दू का होना चाहिए क्योंकि देश भी हिन्दुओ का है।

वही, दिल्ली पर पांडवो ने भी शासन किया है, तोमरो ने भी, चाहमानों ने भी और आख़िरकार मराठाओ ने भी। प्रजा के तौर पर राजवंश या राजा से हमें फर्क तो पड़ता है मगर शासन एक हिन्दू का होना चाहिए क्योंकि देश भी हिन्दुओ का है। नेता आएंगे जाएंगे,पार्टियां भी आज ये तो कल कोई और लेकिन राजा के रूप मे मुहम्मद गौरी और पार्टी के रूप मे कांग्रेस क्या ये हिन्दुओ को मान्य होगा?इतना बड़ा देश है यहाँ स्वदेशी कम पड़ गए जो विदेशो से आमंत्रण देना पड़ रहा है। हम हिन्दू है हम युद्ध जीते या हारे मगर बाउंस बैक जरूर करते है,

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार  2004 हुआ तो दस साल बाद हमने सोनिया गाँधी की खोखली सल्तनत को मिट्टी मे मिला दिया।2003 के विश्वकप मे ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड के विरुद्ध 80 रनो पर 7 विकेट खो दिये थे,सब ही ने मान लिया था कि ऑस्ट्रेलिया हार गयी।लेकिन फिर दो खिलाड़ी डटे रहे 208 रन बनाये और न्यूजीलैंड को 112 पर रोक दिया।

आज हमारी स्थिति भी रिक्की पोंटिंग वाली ऑस्ट्रेलिया जैसी है।लोग हमारा एक एडम गिलक्रिस्ट आउट करके भी खुशी के मारे कपडे फाड़ लेंगे।लेकिन हमें अपना पोटेनशियल पता है,अभी तो उन्हें हैडन और क्लार्क जैसे 6-7 आउट करने है। इन्हे कर लिया तो ब्रेट ली वार्न से निपटना है,अपना पोंटिंग भी इकोसिस्टम जेब मे लेकर घूमता है।  हालांकि हमारा पोंटिंग यानि नरेंद्र मोदी भी कोई अमर नहीं है ना ही अमित शाह अमर है। वो छोड़िये बीजेपी भी कल होंगी या नहीं हमें नहीं पता।

मगर इतना सुनिश्चित करना है कि पॉवर बैलेंस हमारे हाथ मे हो,तोमर जाए तो चौहानों आये,चौहान जाये तो कोई मराठा आये लेकिन दिल्ली की गद्दी पर हिन्दू स्वराज्य का भगवा लहराना चाहिए।समस्या हो जाती है ज़ब कोई गौरी गजनवी बैठ जाते है।इसलिए सत्ता कोई भी हो हमारा ध्येय और लक्ष्य एक ही होना चाहिए।

साथ ही जानकारो के अनुसार  यदि आप भाजपा के अंधभक्त है तो आप अंधे नहीं है बल्कि समझदार है क्योंकि इस समय यही एक मात्र रास्ता है। इसलिए हिन्दू राजवंशो के बाद अब बीजेपी एक लोकतान्त्रिक वंश हमें मिला है,ये किसी संग्रहालय के लिए नहीं है।कृणवंतो विश्वमार्यम आवश्यक है,भारत को अखंड और जग सिर मोर बनाना है। वर्तमान उपलब्ध दलों में बीजेपी सिर्फ एक जरिया है।

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