हनोल मंदिर में – पुरातत्व विभाग द्वारा कार्य से पीछे टला धार्मिक अनुष्ठान

महासू मंदिर हनोल में स्वर्ण कलश स्थापना अनुष्ठान स्थगित

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उत्तराखंड: 07 Nov. 2026, देहरादून / राजधानी स्थित क्षेत्रान्तर्गत जौनसार बाबर के चकराता क्षेम में प्रसिद्ध महासू देवाता को पवित्र स्थल हनोल मंदिर में – पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर में कराए जा रहे जीर्णोद्धार कार्य से पीछे टला धार्मिक अनुष्ठान

(वरिष्ठ पत्रकार चंदराम राजगुरु) की एक रिपोट के अनुसार चकराता क्षेम में प्रसिद्ध महासू देवाता को पवित्र स्थल हनोल मंदिर में  लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़े प्रसिद्ध श्री महासू देवता मंदिर हनोल में 19 से 21 नवंबर को प्रस्तावित स्वर्ण कलश स्थापना अनुष्ठान फिलहाल स्थगित कर दिया गया। मंदिर प्रबंधन समिति ने कहा पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर में जीर्ण शीर्ण हो चुकी पुरानी छत की पटालें बदलने एवं मरम्मत कार्य के चलते धार्मिक अनुष्ठान को पीछे टाल दिया गया। देवता की आज्ञा से मंदिर समिति ने यह निर्णय लिया। मंदिर में मरम्मत कार्य पूरा होने पर स्वर्ण कलश स्थापना के धार्मिक अनुष्ठान की तिथि बाद में घोषित की जाएगी।

वही जिसमें उत्तराखंड:  राज्य में पांचवें धाम के रुप में विकसित हो रहे प्रसिद्ध श्री महासू मंदिर हनोल में 19 से 21 नवंबर को होने वाले धार्मिक अनुष्ठान को स्थगित कर दिया है। मंदिर समिति के मुख्य संरक्षक शांठीबिल के बजीर दीवान सिंह राणा व समिति के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा हनोल मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। पूर्व में मंदिर समिति द्वारा कई बार पत्राचार करने से पुरातत्व विभाग द्वारा हाल ही में मंदिर के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत कार्य को टेंडर लगाए गए हैं। मंदिर की पुरानी छत जीर्ण शीर्ण होने से गर्भगृह एवं पूजा कक्ष में बरसात के समय अंदर पानी टपक रहा है। पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर की छत पर लगी पुरानी पटालें बदली जा रही है। पुरातत्व विभाग को मंदिर की छत पर लगी सभी पटालें बदलने एवं मरम्मत कार्य में करीब तीन माह का लंबा समय लगेगा।

इस दौरान  मंदिर में मरम्मत कार्य के चलते प्रस्तावित स्वर्ण कलश स्थापना एवं धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। देवता की आज्ञा से मंदिर प्रबंधन समिति ने यह निर्णय लिया है। बजीर दीवान सिंह राणा ने कहा मंदिर का कार्य पूर्ण होने के पश्चात देवता की आज्ञा से मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्यों के साथ चर्चा के उपरांत स्वर्ण कलश स्थापना एवं धार्मिक अनुष्ठान की तिथि बाद में घोषित की जाएगी।

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