एक अध्यापक ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की कि वह मरकर भी अमर हो गए-AIIMS

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उत्तराखंड: 22 JULY 2026, बुधवार को देहरादून / राजधानी स्थित  एम्स ऋषिकेश में बुद्धवार को एक और देहदान की प्रक्रिया पूरी की गयी।  आजीवन ज्ञान का उजियारा फैलाने के बाद ऋषिकेश के जाने माने शिक्षाविद रहे एक अध्यापक ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की कि वह मरकर भी अमर हो गए। बुद्धवार की सुबह उनका निधन होने पर उनकी इच्छानुसार परिवार वालों ने उनका पार्थिव देह चिकित्सा और शोध कार्यों के लिए एम्स ऋषिकेश को सौंप दिया। उनके द्वारा किया गया देहदान अब चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से मानव कल्याण के लिए किया जाएगा। अपरान्ह समय एम्स संस्थान द्वारा देहदान करने वाले महादानी के परिजनों को सम्मानित किया गया।

एम्स ऋषिकेश में बुद्धवार को एक और देहदान की प्रक्रिया पूरी की गयी। यह देहदान ऋषिकेश के जाने माने शिक्षाविद और शिक्षा क्षेत्र में विशेष पहिचान रखने वाले भरत मंदिर इंटर काॅलेज में शिक्षक रहे श्री बीएन कुकरेती का था। उनके पुत्र शैलेश कुकरेती ने बताया कि 30 जून 1996 को सेवानिवृत होने के बाद भी उनके पिता समाज और अपने पुरातन छात्रों को अनुशासनात्मक जीवन शैली और चरित्रवान बने रहने की सीख देते रहे। बताया कि जीवित रहते हुए उन्होंने 3 जून 2024 को देहदान हेतु संकल्प पत्र भरकर निधन के बाद एम्स ऋषिकेश को शरीर सौंपने को कह दिया था। उनकी इच्छा के अनुसार बुद्धवार को उनका निधन हो जाने पर एम्स के एनाटाॅमी विभाग में देहदान की प्रक्रिया संपन्न करवायी गयी।

बता दें कि एम्स में पहला देहदान 27 दिसम्बर 2012 को हुआ था। तब से अब तक यहां कुल 104 लोगों द्वारा देहदान किया जा चुका है। डाॅक्टरी की पढ़ाई में मेडिकल के छात्रों और अनुसंधान कार्यों सहित चिकित्सीय परीक्षण में देहदान बहुत की सार्थक है। देहदान प्रक्रिया के दौरान संस्थान द्वारा देहदान करने वाले शिक्षक के परिजनों को सम्मानित कर उनका अभिनन्दन किया गया।

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