उत्तराखण्ड/डेस्क: 01 MARCH.2026, शनिवार को देहरादून। प्राप्त जानकारी के अनुसार साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च, मंगलवार को पड़ रहा है, खास बात यह है कि यह वर्ष का सबसे लंबी अवधि वाला चंद्र ग्रहण माना जा रहा है, इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेंगे, चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य रहेगा।
● चंद्र ग्रहण 2026 का समय – 3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से आरंभ होगा, यह शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा, पूर्ण चंद्र ग्रहण (खग्रास अवस्था) की शुरुआत शाम 4 बजकर 34 मिनट से होगी, यही वह समय होता है जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है।
● भारत में कितनी देर दिखेगा ग्रहण – भारत में इस दिन चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा, चूंकि ग्रहण की समाप्ति 6 बजकर 47 मिनट पर है, इसलिए भारतीय दर्शकों को यह घटना लगभग 25 मिनट तक ही दिखाई देगी, ध्यान रहे कि चंद्रोदय का समय अलग-अलग शहरों में थोड़ा अलग हो सकता है, जिससे दृश्य अवधि में मामूली अंतर संभव है, उदाहरण के तौर पर, दिल्ली में चंद्रोदय लगभग 6 बजकर 22 मिनट पर ही होगा।
● सूतक काल कब से प्रभावी होगा – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है, इस आधार पर सूतक 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा, सूतक के दौरान शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है, पूजा की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता, भोजन पकाने और खाने से बचा जाता है, इस दिन बाल या नाखून काटने जैसे कार्य भी वर्जित माने जाते हैं।
● चंद्र ग्रहण के दौरान किए जाने वाले उपाय – ग्रहण काल को आध्यात्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय माना जाता है, इस दौरान कुछ उपाय करने से सकारात्मक फल मिलता है।
● मंत्र जाप करें – “ऊँ सोमाय नमः” या “ऊँ चंद्राय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है, महामृत्युंजय मंत्र का जप भी लाभकारी बताया गया है।
● दान करें – ग्रहण समाप्ति के बाद सफेद वस्त्र, चावल, चीनी, दूध या चांदी का दान करना उत्तम माना जाता है।
● स्नान करें – ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिले जल से स्नान करें, घर में शुद्धिकरण करें।
● तुलसी या कुश रखें – ग्रहण से पहले भोजन में तुलसी पत्ती या कुश डालने की परंपरा है, जिससे भोजन अशुद्ध नहीं माना जाता।
● गर्भवती महिलाएं सावधानी रखें – तेजधार वस्तुओं का प्रयोग न करें, घर से बाहर निकलने से बचें।
● ध्यान और साधना करें – ग्रहण का समय ध्यान, जप और आत्मचिंतन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
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