न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 22 Jan.2026, गुरुवार को देहरादून ।आज की युवा पीढ़ी का बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन और डिजिटल दुनिया में व्यस्त है। ऐसे समय में बसंत ऋतु का आगमन उनके लिए केवल एक पारंपरिक पर्व या कैलेंडर की तिथि भर न रह जाए, यह एक विचारणीय प्रश्न है। बसंत ऋतु स्वाभाविक रूप से मन को प्रसन्न करने वाली, ऊर्जा और सृजनशीलता बढ़ाने वाली ऋतु मानी जाती है। मौसम का परिवर्तन, रंग-बिरंगे फूल, खुला आकाश और हल्की गर्माहट मनोविज्ञान पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जो युवाओं में उत्साह, आशावाद और सक्रियता को बढ़ा सकती है।
बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का वह पावन पर्व है, जो प्रकृति के नवजागरण और ज्ञान की आराधना का प्रतीक है। आज के समय में बसंत पंचमी हमें यह संदेश देती है कि समाज का वास्तविक विकास शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से ही संभव है। इस दिन विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की उपासना कर हम ज्ञान, विवेक और सृजनशीलता के महत्व को स्मरण करते हैं। शीत ऋतु के अंत और बसंत के आगमन के साथ खेतों में लहलहाती फसलें, पीले पुष्प और उत्साह से भरा वातावरण नई ऊर्जा का संचार करता है।
लेकिन विडंबना यह है कि स्क्रीन पर केंद्रित जीवनशैली के कारण युवा पीढ़ी प्रकृति के इस सकारात्मक प्रभाव से पूरी तरह जुड़ नहीं पा रही है। मोबाइल पर सीमित दुनिया में सिमटने से न तो बसंत के रंग महसूस होते हैं और न ही उसके संदेश—नवचेतना, संतुलन और सृजन का अनुभव। इसके बावजूद बसंत ऋतु युवाओं के लिए एक अवसर बन सकती है, यदि वे कुछ समय डिजिटल दूरी बनाकर प्रकृति, खेल, संगीत, कला और संवाद से जुड़ें।
वास्तव में बसंत ऋतु आज के युवाओं को यह सिखाती है कि तकनीक आवश्यक है, लेकिन प्रकृति से कटाव नहीं। जब युवा पीढ़ी बसंत के उल्लास को अपने जीवन में आत्मसात करेगी, तभी मानसिक स्वास्थ्य, रचनात्मक सोच और सामाजिक जुड़ाव सशक्त होगा। बसंत का असली प्रभाव तभी दिखेगा, जब मोबाइल से नज़र हटाकर जीवन के रंगों को महसूस किया जाए। सूचनाओं की बाढ़, सोशल मीडिया की चमक और आभासी दुनिया की त्वरित संतुष्टि ने उन्हें प्रकृति और आत्मचिंतन से काफी हद तक दूर कर दिया है। ऐसे में बसंत ऋतु का आगमन केवल मौसम परिवर्तन नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक मौन संदेश है!
बसंत ऋतु यह शीत ऋतु और ग्रीष्म ऋतु के बीच संक्रमण काल को दर्शाता है। उत्तरी गोलार्ध में, वसंत ऋतु को आमतौर पर मार्च, अप्रैल और मई के महीनों में माना जाता है। वसंत विषुव के समय, दिन लगभग 12 घंटे लंबे होते हैं, और ऋतु बढ़ने के साथ-साथ दिन की लंबाई बढ़ती जाती है।
इस मौसम में मौसम गर्म हो जाता है और पौधे पुनर्जीवित हो जाते हैं। कई फूल खिलते हैं। वसंत ऋतु में पृथ्वी का अक्ष सूर्य की ओर अधिक झुक जाता है। संबंधित गोलार्ध में दिन की अवधि तेजी से बढ़ जाती है। विशेष रूप से, गोलार्ध गर्म होने लगता है। इस परिवर्तन से नए पौधों का विकास होता है। पौधों की इस वृद्धि के कारण ही इसे “वसंत ऋतु” कहा जाता है।
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