ओडिशा में बाढ़ का कहर, चार दिन में 1.40 लाख लोगों को सुरक्षित निकाला गया
भुवनेश्वर। ओडिशा में बाढ़ की नई लहर से कई जिले प्रभावित हुए हैं। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पिछले चार दिनों में निचले इलाकों में रहने वाले करीब 1.40 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के मुताबिक, राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।
मंत्री ने बताया कि 1,360 ग्राम पंचायतों के तहत आने वाले 7,834 गांवों के निचले इलाकों से लोगों को निकाला गया है। इसके अलावा 38 शहरी स्थानीय निकायों के 219 वार्ड भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
हीराकुंड बांध से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद महानदी में भी बाढ़ की स्थिति बनी है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ दिलीप कुमार राउत ने बताया कि कटक के पास मुंडाली गेज स्टेशन पर नदी का बहाव करीब आठ लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। उनके अनुसार, मुंडाली में 10 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का बहाव बड़ी बाढ़ की स्थिति मानी जाती है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कटक, खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा जिला प्रशासन को अलर्ट किया गया है। अधिकारियों की आशंका है कि महानदी डेल्टा क्षेत्र के कई गांवों में पानी पहुंच सकता है। हालांकि, सरकार को उम्मीद है कि अगले 24 घंटे में स्थिति में सुधार शुरू हो जाएगा।
सबसे ज्यादा प्रभावित बालासोर जिले में सुवर्णरेखा, बुधाबलंग और जलका नदियों की बाढ़ से 11 ब्लॉक के 3.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बालासोर, भद्रक और जाजपुर के कई गांवों में करीब तीन फीट तक पानी जमा है।
राउत ने बताया कि उत्तरी ओडिशा की कई नदियों का जलस्तर अब घट रहा है और वे खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। वहीं, हीराकुंड बांध के 30 स्लुइस गेट से पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन को स्थानीय बाढ़, जलभराव और जरूरत पड़ने पर शहरी अंडरपास बंद करने को लेकर तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही भूस्खलन प्रभावित और जलभराव वाले क्षेत्रों में बागवानी फसलों तथा खड़ी फसलों को होने वाले नुकसान पर नजर रखने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।