क्या.? शेख हसीना को होगी फांसी!

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न्यूज डेस्क/उत्तराखंड: 17 Nov.2025,सोमवार को देहरादून । प्राप्त जानकारी के अनुसार  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ मानवता के विरुद्ध कथित अपराधों पर ICT-BD अपना फैसला सुना दिया है।.  सोमवार को  बांग्लादेश की इंटरनेशनल कोर्ट ने शेख हसीना पर लगे गंभीर आरोपों को सही ठहराते हुए उन्हें फांसी की सजा सुना दी। सजा मिलने के बाद क्या शेख हसीना को होगी फांसी, पूर्व पीएम के पास कितने रास्ते?

साथ ही पूर्व पीएम ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है.भारत सरकार ने बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की तरफ से शेख हसीना को सौंपे जाने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई है।

मानवता के खिलाफ अपराध में वह दोषी करार हैं. उन्हें मौत की सजा दी गई है।  मौत की सजा सुनाई गई है। उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था।

वही दूसरी ओर  5 अगस्त 2024 को तख्तापलट के बाद शेख हसीना और पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमान ने देश छोड़ दिया था। दोनों नेता पिछले 15 महीने से भारत में रह रहे हैं।

बांग्लादेश के पीएम ऑफिस ने बयान जारी कर कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच जो प्रत्यर्पण संधि है, उसके मुताबिक यह भारत की जिम्मेदारी बनती है कि वह पूर्व बांग्लादेशी पीएम को हमारे हवाले करे।

ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया। वहीं दूसरे आरोपी पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को भी हत्याओं का दोषी माना और फांसी की सजा सुनाई। सजा का ऐलान होते ही कोर्ट रूम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।

तीसरे आरोपी पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल जेल की सजा सुनाई गई। ममून हिरासत में हैं और सरकारी गवाह बन चुके हैं। कोर्ट ने हसीना और असदुज्जमान कमाल की प्रॉपर्टी जब्त करने का आदेश दिया है। फैसले के बाद बांग्लादेश के अंतरिम पीएम ने मोहम्मद यूनुस ने भारत से हसीना को डिपार्ट करने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार राजधानी ढाका में विपक्षी दलों व छात्रों के हिंसक आंदोलन के बाद पांच अगस्त, 2024 को शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ कर भारत में शरण लेना पड़ा था। तब से वह भारत में ही हैं। जबकि बांग्लादेश में नोबल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मोहम्मद युनूस की अगुवाई में एक अंतरिम सरकार बनाई गई है।

यह फैसला उनके लिए कुछ हद तक न्याय लेकर आया है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की दमनकारी नीतियों ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया था, और अब उसे फिर से खड़ा करने का समय है. आंदोलन के दौरान करीब 1,400 लोगों की जान गई—ये सिर्फ आंकड़े नहीं थे, बल्कि छात्र, अभिभावक और आम नागरिक थे, जिनके पास अपने अधिकार थे. गवाहियों से साबित हुआ कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर ज़बरदस्त बल का इस्तेमाल किया गया, यहां तक कि हेलिकॉप्टर से भी फायरिंग हुई।

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