आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं: शंकराचार्य जी
शंकराचार्य जी ने दुःखी मन से बिना स्नान किए मेला छोड़ा, इतिहास में पहली बार हुआ
न्यूज डेस्क /उत्तर प्रदेश/ उत्तराखंड: 28 Jan.2026, बुधवार को देहरादून । उत्तर प्रदेश / प्रयाग में एक पत्रकार वार्ता के दौरान शंकाचार्या ने कहा कि हमने दुःखी मन से बिना स्नान किए शंकराचार्य जी ने मेला छोड़ा ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है कि कोई शंकराचार्य बिना स्नान किए मेला छोड कर चले गए। आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं। प्रयाग की इस पवित्र धरती पर हम आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं, लेकिन आज यहाँ से एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी।
उत्तर प्रदेश / प्रयाग में जो कुछ भी घटित हुआ, उसने न केवल हमारी आत्मा को झकझोरा है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। संगम की इन लहरों में स्नान करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संतृप्ति का मार्ग है; परंतु आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए, इस संकल्प को अधूरा छोड़कर यहाँ से विदा ले रहे हैं। जब हृदय में क्षोभ और ग्लानि का ज्वार हो, तो जल की शीतलता भी अर्थहीन हो जाती है। हम प्रेस के अपने बन्धुओं के माध्यम से समाज और प्रशासन तक यह बात पहुँचाना चाहते हैं कि न्याय की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती।
आज हम यहाँ से जा रहे हैं, और अपने पीछे केवल सत्य की गूँज और उन अनुत्तरित प्रश्नों को छोड़कर जा रहे हैं जो प्रयाग की इस हवा में हमेशा विद्यमान रहेंगे।
अब बस कुछ क्षण की शांति और एकांत की आवश्यकता है, ताकि इस पीड़ा को आत्मसात किया जा सके। जिन लोगों ने हमारी पीडा को अनुभव किया और साथ आये उन सबको साधुवाद।
