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देवभूमि का ये शिव पार्वती विवाह स्थल में तीर्थ यात्रियो मे भारी उत्साह देखा जा रहा है

ये धाम नवयुगलों और उनके परिवार के लिए शिव-पार्वती के अखंड आशीर्वाद का प्रतीक भी है ।

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उत्तराखंड: 11 Jan.2026,रविवार को देहरादून ।  उत्तराखंड में  ऊखीमठ।  गढ़वाल उत्तराखंड  के रुद्रप्रयाग जिले में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड में खास  वेडिंग डेस्टिनेशन में से एक है । वही इस  मंदिर में हर साल कई शादियां संपन्न होती हैं ।  देवभूमि का ये धाम नवयुगलों और उनके परिवार के लिए शिव-पार्वती के अखंड आशीर्वाद का प्रतीक भी है ।यह मंदिर अब एक लोकप्रिय आध्यात्मिक विवाह स्थल बन गया है, जहाँ ब्रह्मकुंड, विष्णुकुंड और रुद्रकुंड  जैसे पवित्र कुंड हैं और मंदिर के सामने एक अखंड ज्योति जलती है, जो उनके शाश्वत प्रेम का प्रतीक है, और यहाँ शादी करने से वैवाहिक जीवन सुखी होता है ।

वही इस – रुद्रप्रयाग जिले में शिव – पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण तीर्थ मे शीतकालीन यात्रा धीरे – धीरे परवान चढ़ने लगी है, तथा तीर्थ यात्रियो मे भारी उत्साह देखा जा रहा है । शिव पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण तीर्थ मे शीतकालीन तीर्थ यात्रियो का आकंडा 28 हजार के पार पहुंच गया है ,तथा आगामी मकर संक्रान्ति पर्व पर तीर्थ यात्रियो की संख्या मे भारी इजाफा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। मन्दिर समिति से मिली जानकारी के अनुसार शीतकालीन अवधि मे 13 हजार 628 पुरूष , 11 हजार 923 महिलाये तथा 2548 नौनिहालो सहित 28 हजार 99 तीर्थ यात्री त्रियुगीनारायण तीर्थ मे पूजा – अर्चना व जलाभिषेक कर विश्व समृद्धि की कामना कर चुके है ।

वही जिसमें  गढ़वाल उत्तराखंड के   रुद्रप्रयाग जिले में ही एक और ऐसा ही स्थान है जिसकी कहानी प्रेम की एक अनूठी मिसाल से जुड़ी है।  ये पौराणिक स्थान रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में है. दरअसल, अपनी धार्मिक आस्था के लिए देश दुनिया में प्रसिद्ध ऊखीमठ धाम भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल के रूप में जाना जाता है।  केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद भगवान केदार ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में विराजते हैं।

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