खेल अधिकारी की बेटी का तर्क उसकी तलाक की प्रक्रिया वास्तविक पात्र है!

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उत्तराखण्डः 12 अगस्त 2024, बुद्धवार को देहरादून में प्रदेश सरकार राज्य कर्मचारियों की तलाकशुदा बेटी को पारिवारिकपेंशन का लाभ देने के लिए नियमों में यह बदलाव करने जा रही है। माता-पिता की मृत्यु के बाद भी यदि बेटी का तलाक होता है, तो पारिवारिक पेंशन की हकदार होगी।  वही इस दौरान उत्तराखण्ड सरकार के वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। अब यह प्रस्ताव प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में आएगा।

वही जिसमें  केंद्र सरकार और यूपी में यह संशोधन पहले ही हो चुका है। मौजूदा व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त राज्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को पारिवारिक पेंशन मिलती है। कर्मचारी को मिलने वाली पेंशन का यह 30 प्रतिशत होता है। पारिवारिक पेंशन में अब तक तलाकशुदा बेटी की परिभाषा के मुताबिक, माता-पिता के जीवित रहते हुए जिसकी तलाक की प्रक्रिया पूरी हो गई हो, उसे पात्र माना जाता था। वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के अनुसार, नियमों में बदलाव से अब इस शर्त को हटाया जा रहा है।

उन्होंने कहा की यदि किसी बेटी के तलाक की प्रक्रिया उसके माता-पिता के जीवित रहते शुरू हो गई है और निर्णय यदि बाद में भी आता है तो भी वो पारिवारिक पेंशन की पात्र होगी। सरकार का यह निर्णय एक पूर्व खेल अधिकारी की तलाकशुदा बेटी द्वारा मामला उठाए जाने के बाद लेना पड़ा है।

साथ ही  खेल अधिकारी की बेटी का तर्क था कि उसकी तलाक की प्रक्रिया पिता के जीवित रहते हुए वर्ष 2019 में शुरू हो गई थी। इस विषय पर लंबे समय से विचार विमर्श किया जा रहा था। कुछ समय बाद पिता की मई 2022 में मृत्यु हो गई। इससे पहले माता की वर्ष 2018 में मृत्यु हो गई थी। ऐसे में वो पारिवारिक पेंशन के लिए वास्तविक पात्र है।

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