राष्ट्र भाषा का सपना आज भी अधूरा, 14 सितम्बर.,अथ हिन्दी वेदना गाथा…!

Spread the love

उत्तराखंड: 14 सितंबर. 2025, रविवार को देहरादून । हिन्दी दिवस: 14 सितम्बर, आज से 74 वर्ष पूर्व देश आज़ाद हो गया। संविधान बना, लागू हुआ पर राष्ट्र भाषा का मुद्दा ठंढे बस्ते में डाल दिया गया। क्या राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी, राष्ट्रीय पुष्प का निर्णय जनता से पूछकर किया गया? फिर राष्ट्र भाषा का निर्णय लेने में इतनी कशमकश क्यों? 14 सितम्बर 1949 में संविधान के राजभाषा खण्ड 14 (क) की धारा 301 (क) में लिखा गया कि – संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संविधान में टिप्पणी दी गयी कि पन्द्रह वर्षों तक अंग्रेजी सरकारी प्रयोजनों के लिए कामकाज की भाषा बनी रहेगी। कालान्तर में यह टिप्पणी बार-बार लगती रही और हिन्दी अपने अस्तित्व को खोती रही। स्पष्टतः यह राजनैतिक पूर्वाग्रह ही था।

वही जिसमें  भाषा और धर्म यह दो मुद्दे ऐसे हैं जो राष्ट्र की पहचान हैं और इन्हीं पर राजनीति की बिसात बिछाकर हमेशा हमेशा के लिए जनता की भावनाओं के साथ खेला जा सकता है। हिन्दी राष्ट्र भाषा बनने में सक्षम नहीं है। इतने निराधार आरोप लगाये गये और उसे हमेशा के लिए पदच्युत कर दिया गया। विडम्बना ही है कि कर्तव्य पालन ना जनता के साथ हुआ ना भाषा के साथ हुआ। ख़ैर 7/6/1955 को खेर आयोग का गठन किया गया। 1956 को इस समिति की रिपोर्ट राष्ट्र पति को दी गयी। 1960 में राष्ट्र पति का आदेश निर्गत हुआ और 1963 में राजभाषा अधिनियम संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ। यह नियम संविधान के अनुच्छेद 343 के खण्ड (3) में विहित उपबंधों के आधार पर बनाया गया। 1967 में राजभाषा संशोधन अधिनियम लाया गया। 18/01/1968 में राष्ट्र पति ने इसपर मुहर लगाई। इसे राष्ट्र भाषा संकल्प (1968) कहा गया है।

1976 में किंचित परिवर्द्धन करके राजभाषा नियम लागू किया गया। लेकिन राष्ट्र भाषा का सपना आज भी अधूरा है। राजनैतिक दुराग्रहों का शिकार हिन्दी बनती रही। सच्चाई यह है कि हम एक गूंगे राष्ट्र के नागरिक हैं।यद्यपि हिन्दी अपनी भौगोलिक सीमाओं को लांघकर विदेशों में अपना विकास ध्वज फहरा रही है। प्रचुर शब्दावली, समृद्ध साहित्य इसकी रचनात्मकता है। दुःखद है कि हम आज भी राष्ट्र भाषा को उसका गौरव, सम्मान देने में असफल रहे हैं। हिन्दी दिवस पर हम संकल्प करें कि हिन्दी को उसका गौरव दिलाने के लिए संघर्ष करेंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.