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इस वर्ष नवरात्रि पर मां दुर्गा का इस प्रकार से आना एक बेहद शुभ संकेत है!

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उत्तराखंड: 21 सितंबर. 2025, रविवार को देहरादून ।  वैदिक पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। इस बार शारदीय नवरात्र शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर सोमवार से हो रही है। ऐसे में 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र शुरू होंगे। इस बार चतुर्थी तिथि दो दिन होने के कारण नवरात्रि 10 दिन की है। यह नौ दिन का त्योहार भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 के शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं, जो शुभ और सुख-समृद्धि का संकेत है

 ज्योतिषियों के अनुसार, हाथी पर सवार होकर आना अच्छी वर्षा, कृषि में वृद्धि, दूध उत्पादन बढ़ने और देश में धन-धान्य में बढ़ोतरी का प्रतीक है। यह सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय विकास और देश में शांति, समृद्धि व एकता का भी संकेत देता है। विजयदशमी पर 2 अक्टूबर, 2025 को माता का प्रस्थान भी मनुष्य की सवारी पर होगा, जो सुख-शांति का प्रतीक है। 

 नवरात्रि का शुभारंभ 22 सितंबर 2025 को मां शैलपुत्री की पूजा से होगा। इस दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इस दौरान जौ बोए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसारए जौ बोने से जीवन में सुख.समृद्धि और खुशहाली आती है और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। इस उत्सव का प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशिष्ट स्वरूप को समर्पित है।

धार्मिक मान्यता के अनुसारए नवरात्र में घट स्थापना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और पूजा का पूर्ण फल मिलता है। कलश स्थापना के लिए चांदी, मिट्टी या तांबे के कलश का चयन करें।घटस्थापना की जगह पर गंगाजल का छिड़काव करें। हल्दी से अष्टदल बनाएं। अब कलश में जल भर लें और गंगाजल डालें। इसके अलावा कलश में सिक्काए फूल और अक्षत डालें। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलश के ऊपर रख दें। कलश पर रोली से तिलत करें। अंत में मां दुर्गा के नाम का ध्यान रखें।

इस दौरान नवरात्र को लेकर शहर के मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। शहर के बाजारों में भी नवरात्र को लेकर रौनक देखने को मिल रही है। दुकानदारों ने माता की चुनरी, नारियल, कलावा, धूप.बत्ती,अगरबत्ती, जोत.बत्ती समेत व्रत सामग्री की पूरी व्यवस्था कर रखी है। भक्तजन बड़े उत्साह के साथ खरीदारी कर रहे हैं। इस 22 सितंबर से हो रही है जिसका समापन 01 अक्टूबर 2025 को होगा। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना के दौरान जौ बोए जाते हैं। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इससे साधक को शुभ फल मिलता है।इस शुभ अवधि के दौरान मां दुर्गा के 09 रूपों की पूजा.अर्चना करने का विधान है।  साथ ही व्रत भी किया जाता है।

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