दून अस्पताल में ऐसे आभा से तोबा..तोबा..,PRO मस्त, मरीज दर्द से पस्त

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उत्तराखंड: 12 Jan.2026,सोमवार  को देहरादून / राजधानी स्थित   सुबे का सबसे बड़ा राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, देहरादून आजकल सुर्खियों में बना हुआ है, ऐसा कोई दिन नहीं है जो यह अस्पताल चर्चा में ना हो। वही जिसमें इस दून मेडिकल कॉलेज की न्यू ओपीडी ब्लॉक में रोजाना 2000 से ज्यादा नए व पुराने मरीज इलाज के लिए अपना पंजीकरण करने पहुंचते हैं। वही जिसमें मरीज एवं तीमारदार की भीड़ को देखकर हर किसी के हौसले पस्त हो जाते हैं। इस दौरान सभी मरीजों को पंजीकरण करने से पहले अपना आभा आईडी कार्ड बनाने के के लिए लंबी लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ रहा है। वही जिसमें ओपीडी पर्चा बनाने में जहां पहले 1 मिनट का समय लगता था। वहीं अब आभा आईडी बनाने के लिए मरीज को कम से कम 30 मिनट का समय लग रहा है। जिससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।   समय भी काफी बर्बाद हो रहा है ।

इस दौरान दून अस्पताल के एम. एस. आरएस बिष्ट एवं डिप्टी एमएस. एन.एस. बिष्ट का कहना है कि आभा आईडी बनाने में शुरुआत में कुछ दिखाते आ रही है, लेकिन भविष्य में इसका लाभ मरीजों को जरूर मिलेगा। और मरीजों को इससे सुविधा भी होगी। वही, आरएस बिष्ट एमएस. का कहना है कि अब आभा आईडी बनाना अनिवार्य है। यदि किसी कारण मरीज की आईडी उस समय बनाना संभव नहीं है तो उसका ओपीडी पर्चा बनाने की आदेश दिए गए हैं। यह व्यवस्था में भी धीरे-धीरे सुधार होने वाली है।

इस दौरान आभा आई डी के संबंध में आ रही दिक्कत को करना, व मरीज को बताने के साथ समझाना शुरू कर दिया है। जिसमें अभी परेशानी पूरी दूर नहीं हुई है, इसी के चलते पर्चा बनवाने के लिए लोगों को लंबे समय तक लाइन में लगना पड़ रहा है। यह नियम लागू होने के बाद पहले दिन से आभा आईडी बनाने वालों की संख्या 150 से अधिक थी, वहीं दूसरे दिन 400 से अधिक पहुंच गई है , और फिर तीसरे दिन 550 से भी अधिक संख्या पहुंच गई है। इसी तरह धीरे-धीरे संख्या बढ़ रही है, और मरीजों की आभा आईडी बन रही है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आभा आईडी के बिना भी मरीजो का इलाज किया जाएगा।

इस दौरान सभी पंजीकरण काउंटर पर आभा आई डी बनेगी, साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी व्यक्ति के पास आधार या फिर मोबाइल नहीं है तो किसी प्रकार की देरी नहीं की जाए और उसकी तत्काल ओपीडी पर्चा पहले की तरह बना दिया जाए। बिना इलाज के कोई भी मरीज अस्पताल से नही लौटेगा। जानकारी के अनुसार दून अस्पताल की ओर से आभा आईडी में आने वाली समस्याओं को निपटाने के लिए कोई और आसान रास्ता नहीं खोज रहा है, जल्दी ही इसके विषय में अस्पताल प्रबंधन मरीजों की सुविधा के लिए आसान रास्ता ढूंढ निकलेगा। लेकिन रोजमर्रा यह अस्पताल में मरीजों की इतनी भीड़ बढ़ रही है कि व्यवस्थाऐं पूरी तरह से चरमरा गई है। और मरीज परेशान घूम रहे हैं।

साथ ही यह पर बड़ी हैरानी कर देने वाली बात देखने को मिली है कि दून अस्पताल की ओर से कई जनसंपर्क अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। लेकिन कोई भी मरीज की मदद करने के लिए आगे नहीं आता है, हर कोई मरीज की परेशानी देखकर अपना मुंह घुमा लेता है। जब तक मरीज के पास कोई सोर्स ना हो यहां पर कोई मदद नहीं करता किसी की। जबकि अस्पताल के संबंधित आला अधिकारी मरीजों की सुविधा को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर उनके दावे खोखले साबित हो रहे हैं। वही यहां पर कुछ मरीजों एवं उनके तीमारदारों का कहना है कि ऐसे दून मेडिकल कॉलेज से हमारी तौबा तौबा , एक तो मरीज अपनी बीमारी से परेशान है और दूसरे यहां अस्पताल की व्यवस्थाओं एवं उनके कर्मचारियों की बेरुखी से परेशान होकर तोबा तोबा कर रहा है।

कई मरीज ऐसे देखे हैं जो बेहद  दर्द से कर रहे हैं और उनके तीमारदारों के आंसू आ रहे हैं । लेकिन पर्चा नहीं बन रहा है।  अस्पताल की व्यवस्था बेकाबू हो चुकी है।  कई जनसंपर्क अधिकारी बने किसी की मदद करते नहीं दिखाई दे रहे हैं

इस दौरान दून अस्पताल मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर गीता जैन ने कहा है कि आभा आई बनाने में जो परेशानी आ रही है, उसे दूर करने की कोशिश पूरी करने में लगे हैं । साथ ही कंप्यूटर और लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा है।

दूर  दराज से यह इलाज कराने आए मरीजों का समय इसी आभा आईडी बनाने में लग रहा है, और ओपीडी में दिखाना तो उनके लिए टेढ़ी की साबित हो रही है। मरीजो का कहना है कि हमको सीधा पंजीकरण करने का जो पहले जैसा सिस्टम था वही ठीक है। कम से कम इतना परेशान तो नहीं होना पड़ता। कई महिलाओं ने कहा हमारी गोद में छोटा बच्चा है , हम काफी देर से लाइन में खड़े हैं कुछ नहीं हो रहा है , साथ ही कुछ महिलाओं व पुरुष लाइन में खड़े व उनके तीमारदारों ने कहा हमारे बुजुर्ग मरीज व बच्चे तकलीफ से परेशान हो रहे हैं लेकिन यहां अस्पताल को किसी की कोई परवाह नहीं दिखाई पड़ रही है। क्या इसीलिए दून मेडिकल कॉलेज बनाया गया था कि मरीजों को और उनके तीमारदारों को इस तरह से दुखी किया जाए। ऐसे दून अस्पताल से तोबा तोबा।

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