उत्तराखंड: 21 Jan.2026, बुधवार को देहरादून / राजधानी स्थित सचिवालय में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास उत्तराखण्ड शासन विनोद कुमार सुमन ने बुधवार को राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा सेंडई फ्रेमवर्क के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित बैठक में उन्होंने सेंडई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने विभाग का एक्शन प्लान प्रस्तुत करने को कहा।
समीक्षा बैठक के दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सेंदाई फ्रेमवर्क आपदाओं से होने वाली जनहानि, प्रभावित लोगों की संख्या, आर्थिक क्षति तथा बुनियादी सेवाओं और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने की दिशा में एक वैश्विक रूपरेखा प्रदान करता है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के सभी विभागों को अपनी विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी तथा प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी।
श्री सुमन ने कहा कि सेंदाई फ्रेमवर्क की पहली प्राथमिकता आपदा जोखिम को समझना है।
सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत क्या-क्या किया जाना है-
प्रत्येक विभाग द्वारा विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।
सभी प्रमुख आपदाओं के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया एवं कंटिजेंसी प्लान तैयार किया जाएगा।
प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से समन्वय हेतु नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा।
सभी योजनाओं एवं परियोजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं जलवायु परिवर्तन अनुकूलन को शामिल किया जाएगा।
विभागीय परिसंपत्तियों का खतरा, जोखिम, संवेदनशीलता एवं क्षमता आकलन किया जाएगा।
सभी भवनों, संरचनाओं एवं अवसंरचनाओं का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा।
सभी परिसंपत्तियों की जीआईएस आधारित मैपिंग कर उन्हें सुरक्षित तथा असुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।
भवन उपविधि, सुरक्षा मानक, भूमि उपयोग एवं क्षेत्रीय नियमों का कड़ाई से अनुपालन।
भूकंपीय माइक्रो-जोनिंग, बाढ़ एवं भूस्खलन जोनिंग को योजनाओं में शामिल किया जाएगा।
राज्य, जिला एवं विभाग स्तर पर निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा।
सुरक्षा ऑडिट के आधार पर कमजोर अवसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण तथा पुनर्निर्माण किया जाएगा।
सभी नई परियोजनाओं में बहु-आपदा प्रतिरोधी निर्माण तकनीकों को अपनाया जाएगा।
रिटेनिंग वॉल, तटबंध, शेल्टर, बाढ़ सुरक्षा संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव किया जाएगा।
सभी विभागों द्वारा पूर्व चेतावनी संदेश प्राप्त एवं प्रसारित करने की व्यवस्था की जाएगी।
राहत शिविर, सुरक्षित खुले स्थल, निकासी मार्गों की पहचान एवं मैपिंग की जाएगी।
प्रत्येक विभाग द्वारा विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।
सभी प्रमुख आपदाओं के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया एवं कंटिजेंसी प्लान तैयार किया जाएगा।
प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से समन्वय हेतु नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा।
सभी योजनाओं एवं परियोजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं जलवायु परिवर्तन अनुकूलन को शामिल किया जाएगा।
विभागीय परिसंपत्तियों का खतरा, जोखिम, संवेदनशीलता एवं क्षमता आकलन किया जाएगा।
सभी भवनों, संरचनाओं एवं अवसंरचनाओं का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा।
सभी परिसंपत्तियों की जीआईएस आधारित मैपिंग कर उन्हें सुरक्षित तथा असुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।
भवन उपविधि, सुरक्षा मानक, भूमि उपयोग एवं क्षेत्रीय नियमों का कड़ाई से अनुपालन।
भूकंपीय माइक्रो-जोनिंग, बाढ़ एवं भूस्खलन जोनिंग को योजनाओं में शामिल किया जाएगा।
राज्य, जिला एवं विभाग स्तर पर निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा।
सुरक्षा ऑडिट के आधार पर कमजोर अवसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण तथा पुनर्निर्माण किया जाएगा।
सभी नई परियोजनाओं में बहु-आपदा प्रतिरोधी निर्माण तकनीकों को अपनाया जाएगा।
रिटेनिंग वॉल, तटबंध, शेल्टर, बाढ़ सुरक्षा संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव किया जाएगा।
सभी विभागों द्वारा पूर्व चेतावनी संदेश प्राप्त एवं प्रसारित करने की व्यवस्था की जाएगी।
राहत शिविर, सुरक्षित खुले स्थल, निकासी मार्गों की पहचान एवं मैपिंग की जाएगी।इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारी तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
