उत्तराखंड: 01 Oct. 2025, बुधवार को देहरादून । हिंदू धर्म में दुर्गा पूजा की परंपरा सिर्फ नवरात्रि की स्थापना से लेकर महानवमी तक ही होती है। इस दौरान दूर्गा पूजा पंडालो में श्रद्धालुओं ने घरों और पंडालों में महानवी पूजन किया। इस अवसर पर शहर के पूजा पंडालों और सड़कों पर लोगों का सैलाब उमड़ा।
आज, 1 अक्टूबर 2025 को महानवमी के पावन अवसर पर, भक्तजन माँ सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के बाद कन्या पूजन किया गया , जिसके बाद भोग प्रसाद के रूप में भंडारे का वितरण देहरादून में बने पूजा पंडालों में बड़े पैमाने पर भंडारों का आयोजन किया ।

इस महानवी के शुभ अवसर पर पंडालो में दुर्गा की महाआरती और धुनों नाच में माँ के आगे नृत्य करके माँ को प्रसन्न किया और उज्जवल भविष्य व स्वास्थ्य की कामना की । करनपुर देहरादून में बंगाली लाइब्रेरी दुर्गा पूजा समिति द्वारा बंगाली लाइब्रेरी में 103 वीं दुर्गा पूजा, व उत्तरायण काली बाड़ी में मॉडल कॉलोनी आराघर में 45वी दूर्गा पूजा महोत्सव, एवं श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर करनपुर बाजार में श्री श्री दुर्गा पूजा महोत्सव बजरंग सेवा समिति द्वारा आयोजित 35वीं दुर्गा पूजा महोत्सव में आज महानवी के दिन कन्या पूजन के साथ भण्डारे का आयोजिन किया जिसमें सैकड़ो भक्तो ने भंडारे में भोग प्रदासा ग्रहण किया।

महानवी पर महिलाओं ने देवी का विधि.विधान के साथ कन्या पूजन किया गया।दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में महिलाओं ने मां दुर्गा के सामने धूप.दीप, सिंदूर.फूल आदि से मां की पूजा कर सुख, सौभाग्य, समृद्धि,, संपत्ति आदि का वरदान मांगा। आज महानवमी को दुर्गा पूजा के पंडालों में महानवमी के अवसर पर बलि की जाएगी, जिसके बाद पूजन हवन भी होगा, और इस दिन भक्त देवी दुर्गा के साथ ही लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय की भी पूजा करते हैं। यह राक्षस राजा महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय का उत्सव है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
बता दे कि हिंदू मान्यता के अनुसार महानवी पूजन ये 09 कन्याएं देवी दुर्गा के 09 स्वरूप और 09 कामनाओं का प्रतीक होती हैं। महानवमी के दिन कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है, जिसे कन्या पूजन या कंजक पूजन, कहते हैं। इस पूजा में कन्याओं के पैर धोकर, तिलक लगाकर उन्हें भोजन ;जैसे हलवा, पूड़ी, काले चने, का भोग प्रसाद खिलाने के बाद आशीर्वाद लेने के बाद उपहार, दक्षिणाआदि देकर विदा किया जाता है. कन्या पूजन करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं।

वही दूसरी ओर श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर करनपुर बाजार में श्री श्री दुर्गा पूजा महोत्सव बजरंग सेवा समिति द्वारा आयोजित 35वीं दुर्गा पूजा महोत्सव के मीडिया प्रभारी एव पूर्व अध्यक्ष सोमपाल सिंह ने बताया कि शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025 को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से हो चुकी है, और दुर्गा पूजा का मुख्य समारोह षष्ठी तिथि 28 सितंबर से विजयादशमी 2 अक्तूबर 2025 तक मनाया जाएगा। पांच दिन की इस दुर्गा पूजा में प्रत्येक दिन की अपनी विशेष महत्व और रस्में होती हैं। षष्ठी से लेकर दशमी तक भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करते हैं, देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ-साथ पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भजन-कीर्तन और रंगारंग झांकियों के लिए जाना जाता है।शारदीय नवरात्रि बड़े हर्षोल्लास से मनाई जाती है
