दुर्गाष्टमी को चढ़ा भोग में बंगाला सब्जी व खिचड़ी प्रसाद का भक्तो ने लिया आंनद..! चक्रवर्ती
देहरादून/उत्तराखण्ड: 22, Oct.–2023: खबर…. राजधानी से रविवार को देहरादून स्थित बंगला साहित्य समिति भवन बंगाली लाइब्रेरी करनपुर देहरादून में वर्ष 1922 से आज वर्ष 2023 में 101 वर्ष पूरे होने पर बड़े हर्षोल्लास के साथ दुर्गा महोत्सव मनाया जा रहा है। वही जिसमें बंगाली लाइब्रेरी पूजा समिति के अध्यक्ष आर. एन. मित्रा एवं महामंत्री आलोक चक्रवर्ती ने जानकारी दे हुए कहा कि 20 अक्टुबर 2023, से शुभ मुर्हत में पूजा प्रारंभ की गई। वही जिसमें आज 22 अक्टुबर 2023, को बंगाली लाइब्रेरी दुर्गा पंडाल में शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पूजन विधि विधान से किया गया।
वही आज दुर्गा पूजा का दूसरा दिन में नवरात्रि की दुर्गाष्टमी बहुत खास मानी जाती हैं। वही इस मौके पर महामंत्री आलोक चक्रवर्ती ने बताया कि इस वर्ष 2023 में पूजा समिति बंगाली लाईब्ररी करनपुर में आज पूजा के 101 साल पूरे हो गए हैं! इस अवसर पर बंगाली समुदाय अपनी दुर्गा पूजा के 101वीं वर्षगांठ के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। वही इसी के साथ बंगाली लाइब्रेरी पूजा समिति के अध्यक्ष आर. एन. मित्रा ने बताया कि दुर्गा पूजा पंडाल में माँ दुर्गा की पूजा शेर पर सवार दस भुजा धारिणी महिषासुर मर्दिनी के रूप में विधि विधान के साथ पूजा अर्चना होती है।

दुर्गा पूजनोत्सव के मौके पर समिति की ओर से आज महाष्टमी के दिन भोग प्रसाद/भंडारा का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ो श्रद्धालुओ ने भोग प्रसाद ग्रहण का आंनद उठाया। इस अवसर पर पूजा पंडालो में इस वर्ष भी बंगाला रिति रिवाज के साथ सुबह-शाम पूजा अर्चना, पुष्पांजली, आदि आरती में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
वही इससे पहले पंडाल में दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्तों ने पहुंच कर मां का पूजन अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री श्री दुर्गा पूजा उत्सव, का आयोजन कर परम्परा को आगे बढ़ाने का कार्य करते हुए आज 101वर्ष पूरे हो गए है।
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि 22 अक्तूबर, रविवार कोआठवें स्वरूप महागौरी की आराधना की गई है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी या महाअष्टमी का त्योहार बहुत जोर शोर से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि देवी दुर्गा अष्टमी तिथि पर ही असुरों का संहार करने के लिए प्रकट हुई थीं। इसके अलावा इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। इस दिन लोग कन्या पूजन, कुल देवी पूजन और संधि पूजा भी करते हैं। मां दुर्गाकी महागौरी के पूजा अर्चना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और आपके सभी दुखों को दूर करती हैं। नवरात्रि की दुर्गाष्टमी बहुत खास मानी जाती है. सुबह-शाम आरती में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
वही मुख्य आयोजक पूजा समिति के महामंत्री आलोक चक्रवर्ती ने बताया कि बंगाली समाज द्वारा तैयार किए गए पंडाल में भी दुर्गा पूजन महोत्सव देहरादून शहर/ एवं करनपुर क्षेत्र में रहने वाले लोग एवं समिति के सहयोग से हर साल चार दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन किया जाता है। वही इस दुर्गा पूजा उत्सव के लिए भव्य पंडाल सजाया जाता है। साथ ही अष्टमी को भोग प्रसाद भंडारा के बाद हवन किया जाता है।
आज वही पंडाल में दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा के लिए छह या नवरत्न प्रकार की सब्जी, छह प्रकार की मिठाई और अष्टमी के दिन हलवा पूरी और छोले की सब्जी बना मां दुर्गा को भोग प्रसाद लगाते हैं। इसी के साथ पूजा पंडाल में दोपहर के समय भोज प्रसाद /भंडारे का आयोजन किया गया। इसी के साथ पूजा समिति के महामंत्री चक्रवर्ती ने सभी श्रद्धालुओ से अपील करते हुए कहा कि दुर्गा पंडाल में आने वाले भक्त जन साफ सफाई का विषेश ध्यान दे, भोग प्रसाद ग्रहण करने के बाद झूठे दोने पत्तलो को इधर उधर न फेके तथा पंडाल में प्लास्टिक के प्रयोग ना करे।

वही इसी के साथ बंगाली लाइब्रेरी पूजा समिति के अध्यक्ष आर. एन. मित्रा ने बताया कि पूजा के समय बजने वाले ढाक भी कोलकता से बुलवाए गए हैं। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर खास तरह के दुर्गा पांडालों में किया जाता है, जिसे धुनुची नृत्यहो कहा जाता है। इसे शक्ति नृत्य भी कहा जाता है। धुनुची (एक मिट्टी का बर्तन) में नारियल की जटा, जलते कोयले और हवन सामग्री रखकर नृत्यु किया जाता है और मां की आरती भी इसी से की जाती है। ये नृत्य और आरती बहुत ही खास तरीके से की जाती है।
वही , 24 अक्टुबर 2023, मंगलवार के दिन दुर्गा पूजा का अंतिम दिन होता है।दशहरा वाले दिन शुभ है, इस दिन सिंदूर खेला उत्सव विजयादशमी पर मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और ये कामना करती हैं कि उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। जिसके चलते सभी महिलाएं सच-सच करके एक दूसरे के सिंदूर लगाकर माता को विदा करती है. दोपहर बाद बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा का नेवटा बांध में विसर्जन किया जाएगा । इसके बाद सभी लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं और मिठाईयां देते हैं!
वही इस दौरान देहरादून स्थित दुर्गा पूजा पंडालो में एलएडी (LED) की रंग बिरंगी लाइटिंग की गई। पूरा करनपुर क्षेत्र बंगाली लाईब्ररी करनपुर, पंचायती मंदिर ओल्ड डालनवाला, एवं करनपुर बजार के लक्ष्मी नारायाण मंदिर से सर्वे चौक देहरादून तक दुल्हन की तरह सजाया गया। बता दे की दूर्गा पूजा आयोजको ने पूरे पंडाल को बनाने में लाखो रुपये खर्च किया गए है।

वही देहरादून की बात करे तो शहर में अलग- अलग स्थानों पर एक से बढ़कर एक प्रारूप के पंडाल बनाए गए हैं। जिसमें मुख्य रूप से दुर्गाबाड़ी गढ़ी कैंट, बंगाली लाईब्रेरी करनपुर, ओल्ड डालनवाला करनपुर, लक्ष्मी नारायाण मंदिर करनुपर बाजार, हाथीबड़कता सर्वे स्टेट, ओएलएफ, रायपुर आदि में पष्ठी के दिन दुर्गा पंडालो में मॉ दुर्गा विराजमान है ।
देहरादून स्थित पंडालो में एलएडी की रंग बिरंगी लाइटिंग की गई। पूरा करनपुर क्षेत्र बंगाली लाईब्ररी करनपुर, पंचायती मंदिर ओल्ड डालनवाला, एवं करनपुर बजार के लक्ष्मी नारायाण मंदिर से सर्वे चौक देहरादून तक दुल्हन की तरह सजाया गया। बता दे की दूर्गा पूजा आयोजको ने पूरे पंडाल को बनाने में लाखो रुपये खर्च किया गए है।