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सीएम योगी ने विधानसभा में अविमुक्तेश्वरानंद पर पहली बार बात की जो कुछ कहा,पढ़िए…

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 15 FEB.2026, रविवार को देहरादून ।  सीएम योगी ने कल विधानसभा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर पहली बार बात की। उन्होंने जो कुछ कहा,वह ..प्राप्त प्राप्त जानकारी के मुताबिक  “क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर पूरे प्रदेश में घूम जाएगा। क्या कोई मंत्री का बोर्ड लगाकर घूम जाएगा। क्या कोई सपा का अध्यक्ष बनकर प्रदेश में घूम जाएगा। नहीं एक सिस्टम है,एक व्यवस्था है। भारत के सनातन धर्म में भी यही व्यवस्था है। सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है। सदन की व्यवस्था देखिए,यहां भी परंपरा और नियम से संचालित होता है।
माघ मेले में मौनी अमावस्या पर साढ़े 4 करोड़ लोग आए थे। सबके लिए एक व्यवस्था बनाई गई है। कानून सबके लिए बराबर होता है।मेरे लिए भी वही कानून है जो किसी आम व्यक्ति के लिए है। कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। मेरा यह मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून मानना चाहिए। देश के अंदर शंकराचार्य की पवित्र परंपरा है।
जगतगुरू शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार पीठों की स्थापना की। उत्तर में ज्योतिष पीठ की स्थापना,दक्षिण में श्रृंगेरी,पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका। चार पीठ के चार वेद हैं। ऋग्वेद,यजुर्वेद,सामवेद और अथर्ववेद।इनके सबके अपने मंत्र हैं।आदि जगत गुरु शंकराचार्य ने अनिवार्य किया कि जिस पीठ के लिए जो पात्र होगा उसे परंपरा के अनुसार मान्य किया गया।
योगी ने कहा- हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता ।हर व्यक्ति आचार्य के रूप में जहां-तहां जाकर माहौल खराब नहीं कर सकता। मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा।अगर वह शंकराचार्य थे तो आप लोगों ने वाराणसी में लाठी चार्ज क्यों किया था।एफआईआर क्यों लिखा था।आप कैसी नैतिकता की बात करते हैं।
माघ मेले में उस दिन साढ़े 4 करोड़ की भीड़ थी।जिस तरफ से लोग जा रहे थे,उस रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया।यह किसी जिम्मेदार व्यक्ति का काम नहीं हो सकता।कोई जिम्मेदार व्यक्ति इस तरह का आचरण नहीं कर सकता है।अगर सपा के लोग उसे पूजना चाहते हैं तो पूजे।
लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं,कानून के शासन पर विश्वास करते हैं,कानून का शासन पालन करते हैं,पालन करवाना भी जानते हैं। दोनों चीजों को एक साथ लागू करवाना चाहते हैं।आप लोग इसके नाम पर गुमराह करना बंद करिए।” अब सही गलत का विचार आप स्वयं करें।

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