नमक कम खाने के बावजूद क्यों बढ़ता है ब्लड प्रेशर? रोजमर्रा की इन आदतों पर दें ध्यान

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आजकल उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से लोगों की सेहत को प्रभावित कर रही है। आमतौर पर ब्लड प्रेशर बढ़ने पर खानपान में नमक की मात्रा कम करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, केवल नमक पर नियंत्रण रखना ही पर्याप्त नहीं है। नींद की कमी, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधियों का अभाव, जरूरत से ज्यादा कैफीन और शराब का सेवन जैसी आदतें भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकती हैं।

कई लोग अपनी डाइट में बदलाव तो कर लेते हैं, लेकिन जीवनशैली से जुड़ी दूसरी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं। इसके कारण ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, मोटापा, नींद के दौरान सांस लेने में परेशानी और कुछ दवाओं का इस्तेमाल भी उच्च रक्तचाप के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपनी दैनिक दिनचर्या पर ध्यान दें और समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराएं।

तनाव भी बन सकता है ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह-  काम का दबाव, आर्थिक परेशानियां और पारिवारिक जिम्मेदारियां व्यक्ति को लंबे समय तक तनाव में रख सकती हैं। तनाव के दौरान शरीर में कुछ हार्मोन सक्रिय होते हैं, जिससे दिल की धड़कन तेज हो सकती है और रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं। इससे ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। तनाव के कारण कई लोग जरूरत से ज्यादा खाने, धूम्रपान या शराब का सेवन करने लगते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

पर्याप्त नींद नहीं लेना पड़ सकता है भारी-  नींद की कमी का असर केवल थकान और चिड़चिड़ेपन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह हृदय स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। लगातार कम या खराब गुणवत्ता वाली नींद को हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है।

इसके अलावा, सोते समय तेज खर्राटे आना, सांस रुकने जैसी स्थिति और दिन में अत्यधिक नींद महसूस होना स्लीप एपनिया के संकेत हो सकते हैं। इस समस्या में नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती और फिर शुरू होती है। इसका संबंध उच्च रक्तचाप से भी पाया गया है।

चाय-कॉफी का अधिक सेवन भी करें नियंत्रित- चाय और कॉफी का सेवन भारतीय दिनचर्या का अहम हिस्सा है। लेकिन इनमें मौजूद कैफीन कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर को अस्थायी रूप से बढ़ा सकता है। इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति कितनी मात्रा में कैफीन लेता है और उसका शरीर इसके प्रति कितना संवेदनशील है।

एनर्जी ड्रिंक्स में भी कैफीन की अधिक मात्रा हो सकती है। इसलिए पहले से उच्च रक्तचाप की समस्या से जूझ रहे लोगों को इनके सेवन को लेकर सतर्क रहना चाहिए।

दिनभर बैठे रहने की आदत बढ़ा सकती है जोखिम- ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहना, घर में लगातार सोफे पर समय बिताना और शारीरिक गतिविधियों से दूरी बनाकर रखना भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। निष्क्रिय जीवनशैली से वजन बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे उच्च रक्तचाप का खतरा भी बढ़ सकता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय को स्वस्थ रखने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद करती है। इसके लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैरना और घर के सामान्य काम करना भी उपयोगी हो सकता है।

शराब और तंबाकू से दूरी बनाना जरूरी- शराब का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। वहीं, तंबाकू और निकोटीन रक्त वाहिकाओं तथा हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। धूम्रपान के दौरान ब्लड प्रेशर और हृदय गति में अस्थायी बढ़ोतरी हो सकती है। लंबे समय तक इन आदतों को जारी रखने से हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है।

बचाव के उपाय: शराब से परहेज करना और धूम्रपान सहित तंबाकू के सभी उत्पादों से दूरी बनाना बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यदि इन आदतों को छोड़ने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर की मदद ली जा सकती है।

कुछ दवाएं भी प्रभावित कर सकती हैं ब्लड प्रेशर

कई लोगों को जानकारी नहीं होती कि सामान्य बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकती हैं। सर्दी-जुकाम में नाक खोलने के लिए ली जाने वाली कुछ दवाएं और इबुप्रोफेन जैसे कुछ दर्द निवारक इसके उदाहरण हैं। हालांकि, इनका असर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, दवा की खुराक और इस्तेमाल की अवधि पर निर्भर करता है।

पैकेट वाले खाद्य पदार्थ और मोटापा भी हैं अहम कारण- ब्लड प्रेशर बढ़ने का संबंध केवल खाने में ऊपर से डाले जाने वाले नमक से नहीं है। चिप्स, नमकीन, पैकेट वाले स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड में भी सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है। इनका नियमित और ज्यादा सेवन शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ा सकता है।

इसके अलावा, जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना और शारीरिक गतिविधि की कमी वजन बढ़ने का कारण बन सकते हैं। अधिक वजन होने पर हृदय को शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है, जिससे उच्च रक्तचाप का जोखिम बढ़ सकता है।

ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?

उच्च रक्तचाप कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद रह सकता है। इसलिए केवल सिरदर्द, चक्कर या अन्य लक्षणों के आधार पर इसका पता लगाने की कोशिश करना सही नहीं है। नियमित जांच से ब्लड प्रेशर की स्थिति को समझने और समय पर उचित कदम उठाने में मदद मिलती है।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव को नियंत्रित करना, नियमित व्यायाम करना और नमक का सेवन सीमित रखना इसके जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है। यदि घर पर ब्लड प्रेशर की रीडिंग बार-बार अधिक आ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

ध्यान रखें कि जीवनशैली में बदलाव के बावजूद कुछ लोगों को ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने के लिए दवाओं की जरूरत पड़ती है। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं बंद करना या उनकी खुराक बदलना खतरनाक हो सकता है।

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