दिल्ली में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, पिछले 14 दिन में सामने आए 433 नए मामले

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बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी की सलाह

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मानसून के बीच स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस साल अब तक 1,777 मरीजों में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संक्रमण की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में अस्पतालों की तैयारियों, निगरानी व्यवस्था और संभावित हॉटस्पॉट पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली में मौसमी इन्फ्लूएंजा और H1N1 के मामलों पर लगातार निगरानी की जा रही है। सरकारी अस्पतालों को मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संक्रमित मरीजों के लिए अस्पतालों में अलग वार्ड तैयार किए जा रहे हैं।

14 दिन में सामने आए 433 नए मामले

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 6 अगस्त तक दिल्ली में H1N1 के 1,344 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद महज 14 दिनों में 433 नए मामले सामने आए। 20 अगस्त को ही 114 नए मरीजों की पुष्टि हुई, जिसके बाद इस वर्ष संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,777 हो गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल इसी अवधि में H1N1 के केवल 229 मामले सामने आए थे। इस लिहाज से इस साल संक्रमण के मामले पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना अधिक हैं।

मानसून में बढ़ सकता है फ्लू का असर

विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में नमी के कारण मौसमी इन्फ्लूएंजा के संक्रमण में वृद्धि हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वस्थ लोगों में फ्लू आमतौर पर ठीक हो जाता है, लेकिन बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से हृदय, फेफड़ों या मधुमेह जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

अस्पतालों में भी फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

तेज बुखार और लंबे समय तक खांसी को न करें नजरअंदाज

डॉक्टरों ने लोगों को लंबे समय तक रहने वाली खांसी और तेज बुखार को हल्के में नहीं लेने की सलाह दी है। वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों में होने वाली सूजन कुछ मरीजों में सांस और खांसी से जुड़ी परेशानी को और बढ़ा सकती है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों ने संक्रमण से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ साफ करने, बीमार होने पर घर पर आराम करने और दूसरों के बेहद करीब जाने से बचने की सलाह दी है। जरूरत और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फ्लू का टीकाकरण भी कराया जा सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को लक्षण दिखाई देने पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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