न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 11 AUG. 2026, मंगलवार को देहरादून / राजधानी स्थित उत्तराखंड में परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार को लेकर झारखंड में हो रहे छात्र आंदोलन ने भारतीय युवाओं कि भविष्य के प्रति अपनी चिंता ने समाज में एक हलचल पैदा करती है और युवाओं की जागृति ने समाज के सामने एक नया प्रश्न दे दिया है
भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। बड़ी आबादी 35 साल से कम उम्र की है। देश की शक्ति का स्रोत युवा है तो वर्तमान परिवेश में समाज संस्कृति, राजनीति के रंग और तेवर बदलना तय है, पिछले 10-15 साल में भारतीय राजनीति में जो नई ऊर्जा, नए मुद्दे और नया संवाद दिख रहा है, उसकी सबसे बड़ी वजह युवा सोच है।
राजनीति में जाति, क्षेत्र और पहचान मुख्य मुद्दे होते थे। युवा मतदाता ने इसे बदलकर ‘रोजगार, शिक्षा, कौशल, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी’ को केंद्र में ला दिया। ‘पहली नौकरी’, ‘स्किल इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसे नारे अब मैनिफेस्टो का हिस्सा हैं। युवा पूछता है: 5G कब आएगा, सरकारी भर्ती में पारदर्शिता कब होगी, कैंपस प्लेसमेंट कैसा है। राजनीति को अब केवल भाषण नहीं, डाटा और डिलीवरी देनी पड़ रही है।
सोशल मीडिया संवाद का एक नया माध्यम बन गया है-युवा राजनीति को मोबाइल की स्क्रीन पर ले आया है। ट्वीट, रील, पॉडकास्ट और लाइव अब रैली से ज्यादा असर डालते हैं। कोई भी नेता अब 24 घंटे जनता के सवालों के घेरे में है। फैक्ट चेक, मीम और ट्रेंड के जरिए युवा तुरंत फीडबैक देता है। इससे जवाबदेही बढ़ी है। साथ ही गलत सूचना का खतरा भी बढ़ा है, इसलिए राजनीतिक दल अब डिजिटल सेल और कंटेंट टीम रखते हैं।
संसद और विधानसभाओं में 25 से 40 साल के सांसदों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। वे सूट-बूट के साथ जींस और स्नीकर्स में भी दिखते हैं। उनकी भाषा में ‘आप’ और ‘हम’ ज्यादा है, ‘जनता जनार्दन’ कम। वे इंस्टाग्राम पर सवाल लेते हैं, कॉलेज में टाउनहॉल करते हैं। यह सहजता युवाओं को राजनीति से जोड़ रही है। पंचायत से लेकर लोकसभा तक ‘यूथ विंग’ अब केवल बैनर लगाने का काम नहीं करते, वे नीति बनाने में सलाह देते हैं।
निर्भया आंदोलन, CAA विरोध, किसान आंदोलन, NEET और भर्ती घोटालों पर प्रदर्शन में युवा सबसे आगे रहेऔर झारखंड में हुए छात्रों के आंदोलन में सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाकर वे सरकार से कानून बदलवाते के लिए संघर्षरत है यह दबाव राजनीति को सतर्क करता है। युवा अब ‘वोटर’ से बढ़कर ‘एक्टिविस्ट’ बन गया है। वह सड़क पर भी है और एप पर भी।
युवा राजनीति को केवल सत्ता का खेल नहीं मानता। वह इसे राष्ट्र निर्माण का टूल मानता है। इसी सोच से ‘युवा सांसद’, ‘यूथ पार्लियामेंट’ और ‘मेरा युवा भारत MY Bharat’ तिरंगा यात्राजैसे मंच बने। करोड़ युवा अब सरकारी योजनाओं के वॉलंटियर हैं। वे स्वच्छता, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण में काम कर रहे हैं। राजनीति अब सिर्फ विरोध नहीं, समाधान भी मांगती है।
इस चहल-पहल के साथ खतरे भी हैं। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग, फेक न्यूज और शॉर्ट अटेंशन स्पैन से गहरी बहस कम हो रही है। कुछ युवा नेता केवल फॉलोअर के चक्कर में लोकप्रिय मुद्दे उठाते हैं, जटिल नीतियों से बचते हैं। राजनीति में पैसा और बाहुबल अब भी बाधा है, जिससे ईमानदार युवा अंदर आने से डरता है।
भविष्य में आगे की संभावनाओं को देखते हुए कुछ बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारो की आवश्यकता है, जिससे परीक्षा की सुचिता बरकरार रहना अत्यधिक आवश्यक है
राजनीतिक दलों को 33% टिकट 40 साल से कम उम्र वालों को देने चाहिए।
स्कूल-कॉलेज में ‘संवैधानिक साक्षरता’ अनिवार्य हो ताकि युवा अधिकार और कर्तव्य दोनों समझे।
डिजिटल साक्षरता समाज के लिए एक नई दिशा बनती जा रही है जिसमें सकारात्मक सहजता और वास्तविकता का जोड़ होना आवश्यक है,ताकि युवा ट्रोलिंग और प्रोपेगेंडा में न फँसे। जिस की वास्तविक अर्थो में समाज के निर्माण में सहयोगी बने
युवा सोच ने भारतीय राजनीति को पुरानी लीक से बाहर निकाला है। अब राजनीति सिर्फ सत्ता की नहीं, सपनों की चर्चा है। युवा पूछता है, आलोचना करता है, और साथ में समाधान भी देता है।
युवाओं की ताकत और सकारात्मक सोच नया भारत का आधार बनेगा आज वही हो रहा है। युवा सोच से आई चहल-पहल अगर इसी रफ्तार से चले, तो 2047 का विकसित भारत केवल नारा नहीं, हकीकत बन जाएगा। राजनीति मैं अनुभव के साथ-साथ युवा कदम भी युवा भारत का आधार बनेगा
डॉ रवि शरण दीक्षित– डी ए वी,पीजी कॉलेज देहरादून 98373 18301