उत्तराखंड में उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले उत्पाद अब नहीं बिकेंगे-आयुक्त

नकली डेयरी उत्पादों पर प्रदेशव्यापी प्रतिबंध, मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा

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उत्तराखंड: 06 AUG. 2026, गुरुवार को देहरादून / राजधानी स्थित उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में प्रदेश में शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। जनस्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने की सरकार की स्पष्ट नीति के तहत खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले नकली डेयरी कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग और गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण एवं बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है।

साथ ही उत्तराखण्ड शासन में स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग विनय शंकर पांडेय द्वारा जारी यह आदेश उन उत्पादों पर लागू होगा, जो पनीर, घी, मक्खन या अन्य दुग्ध उत्पादों के नाम पर उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि खाद्य कारोबार में पारदर्शिता और गुणवत्ता भी सुनिश्चित करेगा।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत जारी इस आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध पूरे उत्तराखंड में लागू होगा और राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी माना जाएगा। यह आदेश एक वर्ष तक अथवा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा इस विषय पर अंतिम मानक अधिसूचित किए जाने तक प्रभावी रहेगा।

उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले उत्पाद अब नहीं बिकेंगे–बीते कुछ वर्षों में बाजार में ऐसे उत्पादों की भरमार हो गई थी, जो देखने, पैकिंग और नाम से बिल्कुल पनीर, घी, मक्खन या अन्य दुग्ध उत्पाद जैसे दिखाई देते थे, लेकिन वास्तव में उनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल अथवा अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का इस्तेमाल किया जाता था। ऐसे उत्पाद उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन रहे थे।  जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा अथवा अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का उपयोग किया गया है अथवा जिनकी पैकेजिंग, लेबलिंग और विपणन उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है। हालांकि एफएसएसएआई के मानकों के अनुरूप फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पाद इस प्रतिबंध से बाहर रहेंगे।

बाजार में चलेगा विशेष अभियान, हर जिले में होगी निगरानी–विभाग के अधिकारियों के अनुसार आदेश लागू होने के बाद राज्यभर में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। डेयरी उत्पाद बनाने वाली इकाइयों, गोदामों, थोक और खुदरा बाजारों, होटलों, रेस्टोरेंटों तथा मिठाई की दुकानों की व्यापक जांच होगी। संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने के साथ उत्पाद जब्त करने और लाइसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई भी की जाएगी।

साथ ही  आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग विनय शंकर पांडेय ने स्पष्ट किया कि विभाग राज्यभर में नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और प्रवर्तन अभियान चलाएगा। यदि कोई व्यापारी उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले गैर-मानकीकृत डेयरी उत्पाद बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे खरीदारी करते समय उत्पाद की लेबलिंग, निर्माण सामग्री और लाइसेंस की जानकारी अवश्य देखें तथा किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तत्काल विभाग को दें।

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत–आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग विनय शंकर पांडेय का मानना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में उठाया गया यह कदम उत्तराखंड की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगा। इससे नकली डेयरी उत्पादों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगेगी, उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा।

वैज्ञानिक परीक्षणों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर यह प्रतिबंध लगाया गया है। विभाग पूरे राज्य में व्यापक जांच अभियान चलाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी खाद्य कारोबारियों से अपील है कि वे केवल एफएसएसएआई के मानकों के अनुरूप उत्पादों का ही निर्माण और विक्रय करें।

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