यह राजनीति है प्यारे! बड़ी ज़ालिम चीज़ है!

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 01 AUG. 2026, :EDITORIAL... जानकारो की मान तो राजनीति का चक्का, ये राजनीति है प्यारे,कोई सूजी का हलवा नहीं…जो भी इस रास्ते पर गया,वो पहले जैसा वापस नहीं आया। अगर लौटा भी,तो अपने साथ बदनामी ही लेकर आया।  इतना आसान नहीं है…अभिजीत दीपके के माता-पिता चाहते हैं कि वह वापस अमेरिका लौट जाएं और अपने करियर पर ध्यान दें।लेकिन एक बार राजनीति का चस्का लग जाए,तो उससे निकलना आसान नहीं होता।  यह राजनीति है,कोई खाला का घर नहीं… अब सत्ता और सरकार को छोड़िए,काकरोच पार्टी तो उस सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी मानने से इनकार कर रही है,जिसके एक जज की टिप्पणी के बाद पार्टी का “काकरोच” नाम पड़ा था।
जानकारो की मान तो राजनीति और सत्ता का ग्लैमर ही ऐसा होता है।अब काकरोच पार्टी फिर से आंदोलन की तैयारी कर रही है। ऐसा ही होता है।सत्ता और कुर्सी की चमक में फंसे केजरीवाल ने अपने राजनीतिक गुरु अन्ना हजारे को पल भर में छोड़ दिया था।
अब वही काकरोच सोनम वांगचुक को भी नहीं पूछ रहे,जिन्होंने उनके मंच पर आकर 26 दिन तक अनशन किया था और काकरोच पार्टी को खड़ा करने में मदद की थी। अभिजीत दीपके का असली मकसद घाघ कांग्रेस के अलावा कोई समझ ही नहीं पाया।इसलिए कांग्रेस को छोड़कर बाकी पूरा विपक्ष काकरोच के आंदोलन वाले रथ में घोड़ों की तरह जुड़ गया।
लेकिन पुरानी और अनुभवी कांग्रेस ने राहुल गांधी को पहले ही सावधान कर दिया था कि काकरोच और अभिजीत दीपके का असली मकसद सत्ता है,NEET पेपर लीक नहीं। इसी वजह से राहुल गांधी और कांग्रेस ने छात्रों का मुद्दा तो उठाया,लेकिन अपनी अलग लाइन रखी।इसके लिए उन्हें प्रधानमंत्री के आवास के बाहर जाकर भी बैठना पड़ा।
अब देखिए,बीजेपी शासित सभी राज्यों ने काकरोच के लोगों पर दर्ज केस वापस ले लिए हैं,चाहे उनके ऊपर संज्ञेय अपराध ही क्यों न हों।लेकिन दिल्ली में करीब 3000 अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है,इसलिए काकरोच पार्टी गुस्से में है।
जानकारी के मुताबिक  अभिजीत उनकी भी रिहाई चाहते हैं….क्योंकि उनका कहना है कि वे आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुए थे।अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश न मानने की बात कहकर फिर से जंतर-मंतर पर डेरा डालने की तैयारी हो रही है। असल में राजनीति का स्वभाव ही ऐसा है। इसका स्वाद ही अलग होता है।राजनीति से मिलने वाले ग्लैमर के सामने NEET,IAS,IPS,JEE जैसी परीक्षाएं भी छोटी लगने लगती हैं।
वैसे भी अभिजीत के पीछे जर्मनी में बैठे ध्रुव राठी जैसे लोग हैं,और अमेरिकन डीप स्टेट का भी नाम लिया जाता है।देख लेना,देर-सबेर काकरोच पार्टी राजनीति में जरूर उतरेगी।आखिर योगेंद्र यादव और केजरीवाल जैसे आंदोलन करने वाले लोग यूं ही आंदोलनकारियों के साथ नहीं लगे हैं।वैसे भी अभिजीत दीपके को केजरीवाल का ही प्रोडक्ट बताया जाता है। यह राजनीति है प्यारे!बड़ी ज़ालिम चीज़ है।जो भी इस रास्ते पर गया,पहले जैसा लौटकर नहीं आया।  विपक्ष को जल्द ही पता चल जाएगा कि मोदी को हटाने के लिए काकरोच का मंच सजाना उन्हें कितना भारी पड़ सकता है।

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