उत्तराखंड: 25 JULY 2026, शनिवार को देहरादून / राजधानी स्थित जुलाई माह में मूसलाधार बारिश और जलभराव के बीच एक तरफ जहां पूरा शहर मौसम की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा निगम की लापरवाही ने आम जनता और कर्मचारियों की जान को बड़े खतरे में डाल दिया है। वार्ड नंबर 15 के कर्णपुर क्षेत्र में ढिलाई और नियमों को ताक पर रखकर हाई-टेंशन तारों को केबल में बदलने का काम चल रहा है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। साथ ही नियमों को ताक पर रखकर हो रहा जानलेवा काम स्थानीय लोगों के अनुसार, भूषण पान वाली गली से लेकर कांग्रेस नेता एवं स्थानीय पत्रकार के आवास तक बिजली के पुराने तारों को हटाकर नई केबल बिछाई जा रही है। इस कार्य के दौरान सुरक्षा के सभी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं: वार्ड नं. 15 करनपुर क्षेत्र के जिम्मेदार वही स्थानीय लोगो का कहना है कि बिजली विभाग के जे.ई. एवं एसडीओ मौके पर सुबह से नदारत है।
1- बिना सुरक्षा उपकरणों के काम: बारिश के इस खतरनाक मौसम में लाइनमैन और मजदूर बिना किसी सुरक्षा गियर के काम करने को मजबूर हैं। लाइनमैन बिना ग्लव्स, बिना रबर के जूते पहने (महज चप्पलों में) और नंगे हाथों से खंभों पर चढ़कर जान जोखिम में डाल रहे हैं।
2- बिजली विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार की गैर-मौजूदगी: मौके पर न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद है और न ही काम कराने वाला ठेकेदार। सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।
3- सुरक्षा इंतजाम नदारद: यदि कार्य के दौरान कोई अप्रिय घटना या करंट जैसी दुर्घटना घट जाए, तो मौके पर प्राथमिक उपचार या सुरक्षा का कोई भी इंतजाम नहीं है।
4- विभाग की मनमानी और सूचना का अभाव-नियमों के तहत जब भी किसी क्षेत्र में बिजली लाइनों पर मेंटेनेंस या बदलाव का कार्य किया जाता है, तो जनता को विधिवत रूप से शटडाउन की सूचना दी जाती है और अलर्ट जारी किया जाता है। लेकिन इस मामले में बिजली विभाग द्वारा क्षेत्रवासियों को बिजली बंद रहने का कोई भी पूर्व संदेश या अलर्ट नहीं दिया गया।
5- सुबह से ही लाइनमैन हाई-रिस्क जोन में बिना किसी तय समय-सारणी की घोषणा के कार्य कर रहे हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया, इस गंभीर लापरवाही और खतरे को संज्ञान में लेते हुए जब वरिष्ठ पत्रकार सोमपाल सिंह ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के अधिशासी अभियंता (ईई) से फोन पर संपर्क साधना चाहा, तो उन्होंने फोन उठाने के बजाय काट दिया।
साथ ही इस तरह की टालमटोल और उदासीनता से यह साफ प्रतीत होता है कि बिजली विभाग और ठेकेदार किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि घटना के बाद केवल लीपापोती की जा सके। क्षेत्रवासियों ने ऊर्जा निगम के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि तुरंत इस लापरवाही पर संज्ञान लिया जाए, कार्यशैली में सुधार लाया जाए और काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाएं, अन्यथा किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।