देहरादून। राजधानी के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर पिछले कई दिनों से लगातार सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर खबरें सामने आने के बीच अब मरीजों और उनके तीमारदारों ने वार्ड बॉय की कार्यशैली पर भी गंभीर शिकायतें की हैं।
वही , मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की इमरजेंसी ओटी बिल्डिंग में गंभीर रूप से बीमार, सड़क दुर्घटना में घायल और अन्य मरीजों को डॉक्टर तक पहुंचाने के लिए वार्ड बॉय उपलब्ध नहीं रहते। ऐसे में मरीजों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर उनके परिजनों या तीमारदारों को ही ले जाना पड़ता है। जिन मरीजों के साथ कोई नहीं होता, उन्हें सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
नियमों के अनुसार मरीजों को व्हीलचेयर या स्ट्रेचर पर लाना-ले जाना, भर्ती के बाद वार्ड तक पहुंचाना तथा एक्स-रे, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और ऑपरेशन थिएटर तक ले जाने की जिम्मेदारी वार्ड बॉय की होती है। लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि धरातल पर यह व्यवस्था प्रभावी दिखाई नहीं देती।
इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार सोमपाल सिंह ने दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ( MS) डॉ. आर.एस. बिष्ट से बात की। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी ओटी बिल्डिंग में कुल 24 वार्ड बॉय तैनात हैं, जो तीन शिफ्टों में कार्य करते हैं। प्रत्येक शिफ्ट में छह वार्ड बॉय ड्यूटी पर रहते हैं।
इस पर वरिष्ठ पत्रकार ने सुझाव दिया कि यदि अस्पताल प्रशासन प्रतिदिन इमरजेंसी ओटी की सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा करे, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वार्ड बॉय अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कितनी गंभीरता से कर रहे हैं। उनका दावा है कि अस्पताल का निरीक्षण करने के दौरान इमरजेंसी क्षेत्र में कोई भी वार्ड बॉय मरीजों को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर ले जाता दिखाई नहीं दिया।
उल्लेखनीय है कि दून अस्पताल की इमरजेंसी से हाल के दिनों में लगातार कई घटनाएं सामने आने के बाद अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों का कहना है कि यदि वार्ड बॉय अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन करें, तो गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को अनावश्यक परेशानियों से काफी हद तक राहत मिल सकती है।