65 सेअधिक देशों के साहित्यकार जुड़े, 30 नवोदित रचनाकार अलंकृत

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उत्तराखण्ड: 03 MARCH.2026, मंगलवार को देहरादून/राजधानी स्थित अंतर्राष्ट्रीय लेखक दिवस के अवसर पर लेखक गाँव, थानो  में एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन अपनी विशिष्टता के कारण देश में पहली बार इस स्वरूप में संपन्न हुआ, जिसमें भारत सहित विश्व के 65 से अधिक देशों के साहित्यकार एक मंच से जुड़े।

कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित 26 वरिष्ठ लेखकों तथा विभिन्न देशों से ऑनलाइन जुड़े हिंदी एवं प्रवासी हिंदी साहित्यकारों को ‘लेखक सम्मान’ प्रदान किया गया। साथ ही 30 बाल रचनाकारों—जिनकी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं—को ‘नवोदित लेखक सम्मान’ से अलंकृत कर उनके साहित्यिक अवदान का अभिनंदन किया गया। । सम्मानित बाल लेखकों में प्रणवी भारद्वाज (व्हिस्पर्स ऑफ़ हिल्स), लावण्या कुशवाहा (ट्रेवलिंग थ्रू ए सोलो वेंडरर), देवांश गुप्ता (द हॉरर्स ऑफ़ द हाउंटेड हाउस), श्रेया चुग (क्लॉ मार्क्स ऑन द बाथरूम फ्लोर), आदित्य सागर (क्वांटम होराइजन), वैष्णवी (न्यू नॉलेज), याशिका शर्मा (कोविड-19), अर्घ्य (लाइफ ऑफ़ ए डीनो), आद्रिका सिंह (इट इज़ पॉसिबल), दीप कौर (वेरम डोनम), भव्य भगत (एकेडमी), साक्षी गुप्ता (शैक्षणिक कृति), वृतिका सिंह (नानी / द पावर ऑफ़ मोरल वैल्यूज़), कविशा वर्मा (मेटानोइया), वृंदा (माँ की छाया / पिता – स्मृति में अनुपम स्पर्श), निधि अरोड़ा (कंप्यूटर एजुकेशन पर पुस्तकें), रेहांश चौधरी (ज़ीनोबिया), समृद्धि गुप्ता (माय एक्सकर्शन विद फ्रेंड्स / काउंटेस ऑफ़ मैजिक / व्हिस्पर्स फ्रॉम द लॉस्ट एम्पायर), मनन वर्मा (दस पुस्तकें) तथा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित चैतन्य सिखोला (व्हाई वी आर ऑलवेज रनिंग) प्रमुख रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लेखक गाँव के संरक्षक, सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि लेखक समाज का सजग द्रष्टा, चिंतक और संवेदना का सेतु होता है। उन्होंने घोषणा की कि रचनाशील लेखकों को लेखक गाँव सशक्त मंच प्रदान करेगा। उनकी सृजनशीलता को गति देने के साथ ही उनके साहित्य को लेखक गांव प्रशासन के तहत प्रकाशित भी किया जाएगा। इसके लिए निकट भविष्य में कार्यशालाएँ, संवाद सत्र एवं प्रकाशन योजनाएँ प्रारंभ की जाएँगी।

लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी अतिथियों का स्वागत किया । उन्होंने कहा कि लेखक गाँव केवल एक स्थान नहीं, बल्कि सृजनात्मक चेतना का केंद्र है, जहाँ शब्दों के माध्यम से संस्कृति और संस्कारों का संवर्धन होता है।मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह ‘मैती’ ने अपने संबोधन में कहा कि लेखक गाँव विश्व पटल पर साहित्य की एक विशिष्ट पहचान स्थापित करने का सार्थक कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में डॉ. सर्वेश उनियाल, डॉ. नीरजा शर्मा, सचिन राणा, बालकृष्ण चमोली, अनिल जोशी, तापस चक्रवर्ती, आदित्य वत्स, वीरेन्द्र डंगवाल ‘पार्थ’, नरेन्द्र उनियाल ‘ननु’, डॉ. मनोरमा नौटियाल, नीलम पांडेय ‘नील’, भारती डिमरी, संगीता राणा, मुकेश राणा, संतोष आशीष, डॉ. शशि देवली, डॉ. सौम्यता पांडे, डॉ. रितेश चौधरी, डॉ. सीमा परवीन, डॉ. जागेश्वर सिंह, डॉ. शोभा चौधरी, डॉ. अल्फीशा, डॉ. नीरज श्रीवास्तव एवं हिमालय विरासत ट्रस्ट की अध्यक्ष आशना नेगी सहित अनेक साहित्यकार एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का ऑनलाइन संचालन जर्मनी से अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी समन्वयक डॉ. शिप्रा शिल्पी ने किया, अंत में संयोजक श्रीमती पूजा पोखरियाल ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह ने यह संदेश दिया कि लेखक गाँव हिंदी साहित्य के वैश्विक संवाद को सुदृढ़ करने के साथ-साथ नवोदित और बाल रचनाकारों के लिए सृजन एवं प्रकाशन का सशक्त मंच बनने की दिशा में प्रतिबद्ध है।

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