श्राद्ध पर 122 साल बाद दुर्लभ संयोग: इन 5 राशियों को सावधान रहे?

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उत्तराखंड: 06 सितंबर. 2025, शनिवार को हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहणः 7 सितंबर 2025 को 122 साल बाद का एक दुर्लभ संयोग है। यह एक ब्लड मून का अद्भुत नजारा होगा और यह पितृपक्ष के दौरान लगेगा। वही जिसमें 2025 साल का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा और यह भारत में दिखाई देगा। साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को रात 9:58 मिनट से शुरू होकर 8 सितंबर को रात 1:26 मिनट तक रहेगा। वही जिसमें हिंदू धर्म में जिस खगोलीय घटना चंद्रग्रहण को बेहद अशुभ घटना माना गया है।  जिसके कारण सूतक काल भी मान्य होगा।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ​किसी भी ग्रहण से लगभग 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ होता है. इस साल लगने जा रहे चंद्रग्रहण वाले दिन दोपहर 12:57 से यह सूतक लग जाएगा. ध्यान रहे कि सूतक की समाप्ति ग्रहण के साथ ही होती है. हिंदू मान्यता के अनुसार ग्रहण की अवधि में पूजा, भोजन, खाने-पीने, धार्लीय उपकरण (जैसे चाकू, कैंची), मूर्तियों का स्पर्श आदि वर्जित होते हैं. गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों, बच्चों को विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता रहती है. ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने और धारदार औजारों का प्रयोग करने से बचना चाहिए.

इस चंद्रमा का रंग बदला हुआ नजर आएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार  रविवार को चंद्र ग्रहण के समय आसमान में चांद का रंग लाल दिखेगा। इसे ब्लड मून कहा जाता है। साल 2025 का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को लगेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आते हैं और सूर्य का प्रकाश पृथ्वी की वजह से चंद्रमा पर नहीं पड़ता। इस घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। 7 और 8 सितंबर की रात को लगने वाला यह ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा।यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। इसके साथ ही एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका के कई हिस्सों में यह चंद्र ग्रहण देखा जा सकता है।

साथ ही ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लग रहा है।  जिसमें राहु चंद्रमा के निकट युति में रहेगा और सूर्य-केतु कन्या राशि में होंगे।ज्योतिष के अनुसार साल के आखिरी चंद्र ग्रहण से वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला और कुंभ राशि के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे । यह स्थिति ग्रहों का अशुभ योग बनाती है।  शास्त्रों के अनुसार ऐसी स्थिति प्राकृतिक आपदाओं (भूकम्प, तूफान, बादल फटना आदि) के संकेत हो सकती है।इसके साथ ही वैश्विक राजनीति में भी हलचल भी देखने को मिल सकती है ।

चंद्र ग्रहण का ​राशियों पर प्रभाव: यह स्थिति ग्रहों का अशुभ योग बनाती है।

वृषभ – स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं.

• मिथुन – संतान संबंधी तनाव संभव है.

• सिंह – वैवाहिक जीवन में कलह की आशंका बनी रहेगी.

• तुला – वित्तीय व्यय और लाभ में देरी की आशंका.

• कुंभ – अचानक दुर्घटना या कार्य-स्थान पर शत्रुओं की छेड़छाड़ आशंका बनी रहेगी.

ग्रहण रात 9.57 बजे शुरू होगा और 1.27 बजे समाप्त होगा। इसकी कुल अवधि 3 घंटे 30 मिनट की होगी। चंद्रमा इस समय कुंभ राशि में रहेंगे जहां राहु पहले से मौजूद है। राहु और चंद्रमा की युति से ग्रहण योग बनेगा।

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