Home इंडिया EXCLUSIVE NEWS…मैड को एहसास हुआ: वाकई हमने देश का कचरा बना दिया

EXCLUSIVE NEWS…मैड को एहसास हुआ: वाकई हमने देश का कचरा बना दिया

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 मैड संस्था ने शहर में सभी राजनीतिक दलों और सगठनों को चुनौती दी,
 करीब 50 कट्टे भर कर कचरा एकत्र किया गया,

देहरादून/उत्तराखण्डः राजधानी में  2 अक्टूबर 2019 को आज भारत में गांधी 150वीं व शास्त्री 115 वीं जी की जयन्ती को श्रद्धा एवं हर्षोउल्लास के साथ मनाया। जिसमें इस अवसर आज के दिन मैड संस्था के युवा वर्ग ने कुछ ऐसा कार्य किया जिसे देख लगता है कि वाकई हमने प्लास्टिक का इस्माल कर देश का कचरा बना दिया है। मैड संस्था ने देहरादून शहर में सभी राजनीतिक दलों और सगठनों को अक्सर चुनौती दी है कि वो अपने जीवन के हर पहलू और प्रसार में सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह से बंद करें।

वही जिसमें पिछले आठ सालों से महात्मा गाँधी के आदर्श “स्वच्छता, भक्ति से भी बढ़कर है” पर काम कर रहे देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन, मेकिंग ए डिफरेंस बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) संस्था ने बुधवार को सहस्त्रधारा हेलिपैड के पास एक व्यापक सफाई एवं जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान में करीब चार दर्जन से भी ज़्यादा स्वयंसेवियों ने हिस्सा लिया, जिसमे UPES के SPA चैप्टर के छात्र भी शामिल थे, जिन्होंने मैड के साथ मिल कर साफ़ सफाई और पर्यावरण संरक्षण का सन्देश दिया।

2 अक्टूबर  को आज व्यापक सफाई एवं जागरूकता अभियान में मैड सदस्य पहले एश्ले हॉल के पास एकत्र हुए, और फिर, हर बार की तरह, सार्वजानिक परिवहन के सहारे गंतव्य स्थान तक पहुंचे। मौके पर पहुँच कर मैड सदस्यों को यह एहसास हुआ कि जिस कचरे को वो साफ़ करने वाले थे, वो ज़्यादातर प्लास्टिक कचरा था – वो भी सिंगल यूज प्लास्टिक, जो कि केदारनाथ और बद्रीनाथ से हेलीकाप्टर द्वारा लौटने वाले तीर्थ यात्रियों के जलपान के लिए यहाँ सबसे आसानी से उपलब्ध है।

और पूछताछ करने पर मैड सदस्यों ने यह भी पाया कि चूंकि आसपास के क्षेत्र में कोई कूड़ेदान नहीं था, इसलिए दुकानदारों और पर्यटकों को बस खुले में अपना कचरा खुले में ही फेंकना पड़ता है। करीब 50 मैड सदस्यों और स्वयंसेवकों और UPES  के छात्रों के समर्थन से चार घंटों की कड़ी मेहनत के बाद करीब 50 कट्टे भर कर कचरा एकत्र किया गया।

मैड संस्था के सदस्य जो कि पिछले काफी समय से सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चला रहे है, उन्होंने इस एक्टिविटी में एक भी प्लास्टिक बैनर ना उपयोग कर इस एक्टिविटी को और खास बना दिया। एक्टिविटी के दौरान प्रचार – प्रसार कपड़ों से बने हुए बैनर के जरिए किया गया। UPES के स्टूडेंट्स भी अपने साथ कपड़े का बैनर लेकर आए। यह गौर करने की बात है कि इसी साल मैड द्वारा उनके सालाना कार्यक्रम – मैडाथोन जिसमें 8000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने भाग लिया और 8km लंबी दौड़ पूरी की उसमे एक भी प्लास्टिक वस्तु का प्रयोग ना कर मैड ने एक अद्भुत उदाहरण पेश किया था।

मैड संस्था ने देहरादून शहर में सभी राजनीतिक दलों और सगठनों को अक्सर चुनौती दी है कि वो अपने जीवन के हर पहलू और प्रसार में सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह से बंद करें। मैड को उम्मीद है कि स्वछता पर बढ़ती जागरूकता के साथ, यह संस्था एक दिन स्वच्छ दून देखने के अपने इस प्रयास में सफल होगी। अभियान में आदर्श त्रिपाठी, करन कपूर, खुशाली गुप्ता, सारंग गोडबोले, इन्दर, आर्ची बिष्ट शामिल थे।

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